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आदिवासियों के साथ मारपीट के मामले में एसपी ने तीन पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

Written by:Atul Saxena
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खास बात ये है कि घटना के लिए प्रमुख आरोपी माने जा रहे थाना प्रभारी (टीआई) पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आदिवासी समाज और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बनी हुई है।
आदिवासियों के साथ मारपीट के मामले में एसपी ने तीन पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

मध्य प्रदेश पुलिस पर एक बार फिर प्रताड़ना के आरोप लगे हैं, मामला छतरपुर जिले के आदिवासियों से जुड़ा है, एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मारपीट और प्रताड़ना के आरोपी तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और पूरे घटनाक्रम के जाँच के आदेश दिए हैं।

छतरपुर जिले में नौगांव थाना पुलिस की तानाशाही और अमानवीय व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नौगांव पुलिस ने आदिवासी समुदाय के पांच निर्दोष युवकों को बिना कारण डिसलरी रोड से जबरन उठाया और चोरी के झूठे मामले में फंसाकर थाने में घंटों तक बेरहमी से पीटा इसमें एक दिव्यांग भी था। इस घटना ने आदिवासी समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, धर्मपुरा गांव के पांच आदिवासी युवक, जो झाड़ू बनाकर, दिहाड़ी मजदूरी से गुजारा करते हैं, उनको पुलिस ने बिना सबूत के गिरफ्तार किया। परिजनों का कहना है कि इन युवकों का चोरी से कोई संबंध नहीं है, फिर भी पुलिस ने उन्हें झूठे केस में फंसाया और थाने में अमानवीय ढंग से पिटाई की।

तीन दिन तक थाने में आदिवासियों से मारपीट के आरोप   

पीड़ितों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें घेर लिया और थाने ले आये फिर बेरहमी से पिटाई की, कारण पूछने पर बताया कि तुमने डीपी की चोरी की है, जब अदिवासियों ने चोरी से इंकार किया तो गाली देकर और मारने लगे, दिन भर थाने में रखने के बाद रात को छोड़ दिया, फिर अगले दिन सुबह चार लोगों को वापस थाने बुलाया फिर पीटा और ये सिलसिला तीन दिन तक चलता रहा।

गुप्तांग में मिर्ची डालने के आरोप, MLC में नहीं मिला प्रमाण 

मामला मीडिया में आया तो विपक्ष से लेकर क्षेत्र के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया,  नौगांव पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने शुरू हो गए। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग होने लगी, पीड़ित आदिवासी और उनके परिजनों ने पहले एसडीओपी कार्यालय फिर एसपी कार्यालय पर धरना दिया, पीड़ित आदिवासियों ने अपने कपड़े उतारकर मारपीट के निशान दिखाए उसे देखकर हर कोई सिहर गया। पीड़ितों ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने हमारे साथ तानाशाह की तरह व्यवहार किया, एक ने गुप्तांग में मिर्ची डालने का आरोप तक लगाया हालाँकि एमएलसी में ऐसा  कोई प्रमाण नहीं मिला।

पीड़ित आदिवासियों ने देर रात तक दिया धरना 

पीड़ितों ने एसपी से कहा हम गरीब है इसलिए हमारे साथ बिना किसी कारण मारपीट की गई, हमें न्याय मिलना चाहिए।धरना देर रात करीब 2 बजे तक चला उसके बाद एसपी अगम जैन ने एसडीओपी को जाँच के आदेश दिए और आदिवासियों को न्याय भरोसा देकर घर भेज दिया।

मारपीट के आरोपी तीन पुलिसकर्मी निलंबित 

एसपी के निर्देश पर एसडीओपी ने जाँच पूरी कर रविवार को एसपी को दे दी जिसके बाद  मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच रिपोर्ट के आधार पर एसपी अगम जैन ने नौगाँव थाने में पदस्थ एएसआई शिवदयाल, प्रधान आरक्षक अरविंद शर्मा और आरक्षक राम जाट को निलंबित कर दिया है और पीड़ित आदिवासियों को भरोसा दिया है कि उनके साथ न्याय होगा। 

छतरपुर से सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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