मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने 24 मई को पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी विभागों को पेयजल संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण और प्रतिदिन मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए। नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई, जल निगम आदि विभागों के पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी अमले के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अवकाश की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों एवं नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और नगर निगम के अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। उन्होंने कलेक्टरों को सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाने और पेयजल उपलब्धता के लिए अधिकारियों की समिति बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करने को कहा है।
टैंकर के दुरुपयोग पर रोक
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने निर्देश दिए कि यह अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि टैंकर से पेयजल आवश्यकता वाले क्षेत्रों में वितरित हो और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हो। उन्होंने टैंकर के दुरुपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव जैन ने अधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों से संवाद और समन्वय रखकर पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। पेयजल उपलब्धता के लिए युद्ध स्तर पर काम करने को भी कहा गया है।
शहरी क्षेत्र की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखें और अन्य विभागों के साथ ही ऊर्जा विभाग को भी इस पूरे प्लान में शामिल करें। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी नलजल योजना का विद्युत कनेक्शन न कटे।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या है प्लान?
इस मामले को लेकर मुख्य सचिव जैन ने बताया कि राज्य शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में वोरवेल आदि के खनन के लिए 1500 करोड़ रुपये की राशि जारी की है और पंचायतों को संधारण कार्य के लिए 55 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई है। ताकि पेयजल उपलब्धता में कोई असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर मेकेनिज्म तैयार करें और नियमित रूप से समीक्षा करें। बैठक में नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पीएचई, ऊर्जा और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए।
जल्द से जल्द हो समस्याओं का निराकरण
मुख्य सचिव जैन ने कंट्रोल रूम को कलेक्टरों को खुद लीड करने का निर्देश दिया है। ताकि जनप्रतिनिधियों आदि से प्राप्त होने वाली शिकायतों के अलावा लोक सेवा गारंटी तथा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का कम समय में निराकरण हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ बेहतर संवाद रखें एवं पेयजल उपलब्धता तथा शिकायतों के निराकरण का प्रचार-प्रसार भी करें।
अगले एक माह के लिए प्लान बनाकर रोज सख्ती से मॉनीटरिंग करने का निर्देश भी दिया गया है। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि वे ट्रीटेड वॉटर का भी समुचित उपयोग करें साथ ही टैंकर से जल प्रदाय पर विशेष ध्यान रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर हाल में बसाहटों में टैंकर पहुंचे तथा जल प्रदान करें।
विशेष सतर्कता रखें कमिश्नर
नई एसओपी जारी की गई है, एसओआर को रिवाइज किया गया है। और अब जल संधारण के 10 हजार तक के कार्य पंचायत स्वयं कर सकती है। मुख्य सचिव ने कहा कि 15वां एवं 16वां वित्त आयोग की राशि का भी पेयजल उपलब्धता में उपयोग किया जा सकता है। मुख्य सचिव ने बताया कि केन्द्र वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, मूलभूत मद, अन्य अनुदान जो केन्द्र या राज्य शासन से दिया गया है।
इसके अलावा पंचायत की स्वयं के आय के स्रोतों से भी पेयजल व्यवस्था पर पंचायतें व्यय कर सकती हैं। उन्होंने कमिश्नर से भी अपने संभाग में विशेष सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा है। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कलेक्टरों से कहा कि वे पेयजल के सभी स्रोतों पर विशेष सतर्कता रखें और पहले से यह जानकारी रखें कि कहीं स्रोत में जल की कोई कमी तो नहीं हो रही है। वैकल्पिक रूप से जल स्रोत की उपलब्धता पर भी पहले से काम करने को कहा गया है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कलेक्टरों से कहा कि 25 मई से प्रदेश में दो दिवसीय गंगा दशहरा के आयोजन होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. माहेन यादव स्वयं 25 और 26 मई को उज्जैन के क्षिप्रा तट पर अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। शुक्ला ने कहा कि आयोजनों को पेयजल से जोड़कर जनोपयोगी बनाया जाए और जन-प्रतिनिधियों तथा आमजन की उपस्थिति सुनिश्चित करें।
मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन की अध्यक्षता में आयोजित VC बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े शामिल हुए। बैठक में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।#JansamparkMP #indore #इंदौर #DrinkingWater #PublicService@CMMadhyaPradesh pic.twitter.com/xwENskIjh1
— Indore Commissioner (@comindore) May 24, 2026






