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महाराष्ट्र में आरक्षण पर बढ़ी हलचल, कई समाजों ने उठाई अपनी-अपनी मांग

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। मराठा समाज के आरक्षण आंदोलन के बाद सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है, जिसके बाद अब अन्य समाजों ने भी अपनी-अपनी मांगों को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र में आरक्षण पर बढ़ी हलचल, कई समाजों ने उठाई अपनी-अपनी मांग

महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। मराठा समाज के आरक्षण आंदोलन के बाद सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है, जिसके बाद अब अन्य समाजों ने भी अपनी-अपनी मांगों को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। इन समाजों में ओबीसी, धनगर, बंजारा, एसटी और एनटी समाज शामिल हैं। ओबीसी समाज पहले से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं अन्य समुदाय भी अलग-अलग बैठकों और ज्ञापन के जरिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, हैदराबाद गैजेटियर में बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में दर्ज बताया गया है। इसी आधार पर मुंबई में हुई सर्वदलीय बैठक में बंजारा समाज के नेताओं ने एसटी प्रवर्ग से आरक्षण की मांग रखी। इस बैठक में मंत्री संजय राठौड़ और कई विधायक भी शामिल हुए। नेताओं ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में वे राज्य सरकार को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट और मांगपत्र सौंपेंगे। इससे स्पष्ट है कि बंजारा समाज अब संगठित होकर एसटी आरक्षण के लिए दबाव बनाने की तैयारी में है।

महाराष्ट्र में आरक्षण पर बढ़ी हलचल

इसी बीच, धाराशिव में मराठा क्रांती मोर्चा ने आरक्षण के मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज किया। राज्य समन्वयक सुनील नागणे ने कहा कि मराठा समाज को कुणबी-मराठा के नाम पर आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि सीधे ओबीसी कोटे से आरक्षण मिलना चाहिए। उनका कहना था कि जिनके दस्तावेजों में कुणबी प्रविष्टि है, केवल उन्हें ही लाभ दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मराठा समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। नागणे ने चेतावनी दी कि “सरसकट कुणबी प्रमाणपत्र देना टिकाऊ नहीं होगा, हमें ओबीसी कोटे से ही मराठा समाज के रूप में आरक्षण मिलना चाहिए, अन्यथा यह समाज के साथ अन्याय होगा।”

वहीं जालना में धनगर समाज के लोगों ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जिला अधिकारी आशिमा मित्तल के जरिए ज्ञापन सौंपकर अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रवर्ग से आरक्षण लागू करने की त्वरित मांग की। समाज के नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों पर अगर तुरंत अमल नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर बड़े स्तर पर अनशन किया जाएगा। इस तरह मराठा आंदोलन के बाद अब कई अन्य समाजों के सक्रिय होने से राज्य की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा और भी गर्मा गया है।

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