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क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब? आखिर क्यों केंद्र ने दिया इसे खाली करने का आदेश? सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप!

Written by:Rishabh Namdev
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दिल्ली की सत्ता के गलियारों में दशकों से रसूख और रुतबे का प्रतीक रहे जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार ने खाली करने का आदेश दिया है, जो एक बड़े बदलाव का संकेत है। चलिए आज हम आपको बताते हैं क्या है जिमखाना क्लब?
क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब? आखिर क्यों केंद्र ने दिया इसे खाली करने का आदेश? सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप!

राजधानी दिल्ली के उन चुनिंदा ठिकानों में शुमार, जहां सत्ता और रसूख की महफिलें सजती रही हैं, दिल्ली जिमखाना क्लब को अब केंद्र सरकार ने 5 जून तक अपना परिसर खाली करने का आदेश दे दिया है। दरअसल यह आदेश मात्र एक क्लब को हटाने का नहीं, बल्कि दशकों पुरानी दिल्ली की ‘पावर कल्चर’ में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। बता दें कि सरकार ने लुटियंस दिल्ली में स्थित 27.3 एकड़ की इस विशाल भूमिको रक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के लिए आवश्यक बताया है।

दरअसल केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा जारी किया गया यह आदेश उस क्लब के लिए है, जो प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब लोक कल्याण मार्ग इलाके में स्थित है। यह क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील और उच्च-सुरक्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में, यह मामला सिर्फ जमीन खाली कराने तक सीमित नहीं, बल्कि उस प्रतिष्ठान की कहानी से भी जुड़ा है, जिसे दशकों से दिल्ली की सत्ता, विलासिता और प्रभावशाली नेटवर्किंग संस्कृति का प्रतीक माना जाता रहा है।

क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब?

दिल्ली जिमखाना क्लब की शुरुआत 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में हुई थी। उस दौर में यह क्लब अंग्रेज अफसरों, सैन्य अधिकारियों और औपनिवेशिक अभिजात्य वर्ग के लिए विशेष रूप से बनाया गया था। देश को आजादी मिलने के बाद इसके नाम से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया, परंतु इसकी पहचान और संस्कृति लंबे समय तक एक औपनिवेशिक एलीट क्लब जैसी ही बनी रही। क्लब की मौजूदा इमारतें 1930 के दशक में बनकर तैयार हुई थीं और आज भी उनमें ब्रिटिश वास्तुकला की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। इसके विशाल लॉन, लकड़ी से बने पुराने हॉल, क्लासिक बार और औपनिवेशिक शैली की सजावट इसे दिल्ली के सबसे खास क्लबों में एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं जिमखाना क्लब!

जिमखाना क्लब केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि इसे लंबे समय से दिल्ली की ‘पावर सर्किट’ का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता रहा है। यहां देश के बड़े सांसद, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ आइएएस और आइपीएस अधिकारी, सेवानिवृत्त जनरल, न्यायाधीश, राजनयिक और बड़े कारोबारी नियमित रूप से आते रहे हैं। संसद, साउथ ब्लॉक और प्रधानमंत्री आवास के निकट होने के कारण यह जगह अनौपचारिक राजनीतिक बैठकों और महत्वपूर्ण नेटवर्किंग के लिए बेहद अहम रही है। कई लोगों के लिए इसकी सदस्यता सिर्फ क्लब की सुविधा का लाभ उठाना नहीं, बल्कि दिल्ली के प्रभावशाली नेटवर्क में प्रवेश का एक जरिया मानी जाती थी।

क्या क्या है इसके अंदर?

दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता हमेशा से बेहद सीमित और विशिष्ट रही है। इसकी प्रतीक्षा सूची कई बार दशकों लंबी बताई गई है। यही कारण है कि इसकी मेंबरशिप को दिल्ली के सबसे बड़े ‘स्टेटस सिंबल’ में गिना जाता है। क्लब के भीतर प्रीमियम रेस्टोरेंट, बार और लाउंज, टेनिस और स्क्वैश कोर्ट, स्विमिंग पूल, घुड़सवारी और अन्य खेल सुविधाएं, विशाल लॉन और निजी आयोजनों के लिए विशेष स्थान जैसी उच्च-स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। दिल्ली की राजनीतिक और नौकरशाही संस्कृति में इसकी छवि एक ऐसी जगह की रही है, जहां भले ही औपचारिक फैसले कमरों में होते हों, लेकिन रिश्ते और समीकरण अक्सर क्लब के डाइनिंग टेबल और हरे-भरे लॉन में ही बनते रहे हैं।

क्यों केंद्र ने इसे खाली कराने के दिए आदेश?

सरकार ने जमीन वापस लेने का यह फैसला क्यों किया, इस पर एलएंडडीओ ने अपने आदेश में कहा है कि 2, सफदरजंग रोड स्थित यह जमीन मूल रूप से एक सामाजिक और स्पोर्ट्स क्लब चलाने के लिए पट्टे पर दी गई थी। अब सरकार का तर्क है कि इस इलाके की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई है और यह जमीन रक्षा व प्रशासनिक जरूरतों के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पट्टा (लीज) समाप्त किया जा रहा है और सरकार 5 जून को परिसर का कब्जा ले लेगी। यदि क्लब ने निर्धारित समय तक परिसर खाली नहीं किया, तो कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई कर कब्जा लिया जाएगा।

दिल्ली जिमखाना क्लब पिछले कुछ वर्षों से लगातार कानूनी और प्रशासनिक विवादों में रहा है। केंद्र सरकार ने पहले भी क्लब के प्रबंधन, सदस्यता प्रक्रिया और वित्तीय मामलों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे। यह मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और बाद में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) तक पहुंचा था, जहां केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को सही ठहराया गया। इसके बाद सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों की भूमिका भी बढ़ी। अब जमीन वापस लेने के इस आदेश को केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि दिल्ली के सबसे प्रभावशाली संस्थानों में से एक पर सरकार के बढ़ते नियंत्रण के तौर पर भी देखा जा रहा है। दिल्ली जिमखाना क्लब की यह कहानी सिर्फ एक स्पोर्ट्स क्लब की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस लुटियंस दिल्ली की कहानी है, जहां सत्ता, नौकरशाही, राजनीति और एलीट नेटवर्क दशकों से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इस जमीन को वापस लेने की तैयारी, सिर्फ एक परिसर खाली कराने का मामला नहीं, बल्कि दिल्ली की पुरानी ‘पावर कल्चर’ में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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