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बंगाल के फालता में मतगणना आज, भाजपा के देबांग्शु आगे, जहांगीर खान चौथे नंबर पर, जानिए क्या TMC के चुनाव चिन्ह पर पड़े वोट मान्य होंगे?

Written by:Banshika Sharma
Published:
पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर मतगणना में भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं, वहीं चुनाव से पीछे हटे TMC के जहांगीर चौथे स्थान पर हैं। सुबह 10 बजे तक दो राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है और अभी तक उन्हें 481 वोट मिले हैं।
बंगाल के फालता में मतगणना आज, भाजपा के देबांग्शु आगे, जहांगीर खान चौथे नंबर पर, जानिए क्या TMC के चुनाव चिन्ह पर पड़े वोट मान्य होंगे?

पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर जारी मतगणना में एक अनोखा सियासी मोड़ सामने आ रहा है, जहाँ भाजपा के प्रत्याशी देबांग्शु ने 15 हजार वोटों की निर्णायक बढ़त ले ली है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वह उम्मीदवार जहांगीर खान, जिन्होंने चुनाव से हटने का ऐलान किया था, वे चौथे स्थान पर चल रहे हैं। दरअसल सुबह 10 बजे तक दो राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है और अभी तक उन्हें 481 वोट मिले हैं। फालता सीट पर कुल 21 राउंड की मतगणना होनी है, जिसमें हर पल समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।

वहीं इस सीट पर 285 बूथों पर 21 मई को दोबारा मतदान कराया गया था। रीपोलिंग में मतदान प्रतिशत में लगभग 2% की वृद्धि दर्ज की गई, जहाँ चुनाव आयोग के अनुसार 88.13% वोट डाले गए। इससे पहले, 29 अप्रैल को हुए मतदान में 86.71% वोटिंग हुई थी। फालता में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा था, हालांकि आधिकारिक तौर पर कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे।

जहांगीर खान ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी

दरअसल चुनाव से कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने घोषणा कर दी थी कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह घोषणा दोबारा मतदान से ठीक पहले की गई थी, हालांकि उनके द्वारा यह बात लिखित में दिए जाने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। यही कारण है कि रीपोलिंग के दौरान भी ईवीएम में उनका नाम और पार्टी का सिंबल मौजूद रहा। वहीं मतदान प्रक्रिया में जहांगीर खान या किसी अन्य टीएमसी कार्यकर्ता ने भाग नहीं लिया और वोटिंग वाले दिन जहांगीर खान अपने घर से भी गायब रहे। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, नॉमिनेशन और नाम वापस लेने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी, ऐसे में जहांगीर खान ने भले ही अपना नाम वापस लेने की घोषणा की हो, लेकिन आधिकारिक तौर पर उनका नाम वापस लेना संभव नहीं था और वे अब भी टीएमसी के उम्मीदवार ही कहलाएंगे।

क्या टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर पड़े वोट मान्य होंगे?

वहीं इस स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी दुबे का कहना है कि इस पर अंतिम संज्ञान चुनाव आयोग को ही लेना होगा। यदि आयोग जहांगीर का लिखित आवेदन स्वीकार कर लेता है तो टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर पड़े वोट मान्य नहीं होंगे। हालांकि, यदि जहांगीर ने केवल मौखिक तौर पर अपना नाम वापस लिया है और आयोग ने उनकी उम्मीदवारी पर कोई संज्ञान नहीं लिया है, तो ज्यादा मतदान मिलने पर जहांगीर जीत का दावा भी कर सकते हैं।

फालता विधानसभा सीट का इतिहास देखा जाए तो यह पहले सीपीआई(एम) का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन अब यह तृणमूल कांग्रेस का मजबूत क्षेत्र बन चुकी है। टीएमसी ने पहली बार 2001 में यह सीट जीती थी, फिर 2006 में सीपीआई(एम) ने वापसी की। हालांकि, 2011 के बाद से टीएमसी लगातार यहां जीत दर्ज कर रही है। खास बात यह है कि भाजपा अब तक इस सीट पर कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। अगर भाजपा इस बार फालता में जीत दर्ज करती है तो यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

भाजपा ने 10 सीटें जीती

दरअसल फालता साउथ 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है, जहाँ कुल 31 सीटें हैं। वहीं फालता को छोड़कर बाकी 30 सीटों में भाजपा ने 10 सीटें जीत ली हैं। सागर, काकद्वीप, गोसाबा और सोनारपुर जैसे ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ जादवपुर, टॉलीगंज, बेहला पूर्व-पश्चिम जैसे शहरी इलाकों में भी भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की है। वहीं, बासंती, कुलतली, रायदीघी और बजबज जैसी सीटों पर टीएमसी अपनी पकड़ बचाने में सफल रही है।

भाजपा ने हासिल की शानदार जीत

वहीं बंगाल में इस बार भाजपा ने कुल 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर 15 साल बाद ममता सरकार के राज को खत्म कर दिया है, जबकि टीएमसी को सिर्फ 80 सीटें मिली हैं। यदि भाजपा फालता में भी जीत जाती है तो उनकी सीटों की संख्या 208 हो जाएगी, जो उनके लिए एक और महत्वपूर्ण कदम होगा। 29 अप्रैल को मतदान के बाद फालता क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। उस दिन कई बूथों से शिकायतें मिली थीं कि ईवीएम पर भाजपा के सिंबल पर टेप चिपकाया गया था। तत्कालीन ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने खुद निर्वाचन क्षेत्र का दौरा कर जांच-पड़ताल की थी और कम से कम 60 बूथों में छेड़छाड़ के सबूत मिले थे। ईवीएम में कथित हेरफेर के अलावा, जांच में यह भी सामने आया था कि कई मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों में फुटेज के साथ भी छेड़छाड़ करने की कोशिशें की गई थीं, जिसके बाद ही यहां रीपोलिंग का फैसला लिया गया था।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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