देश में कॉकरोच जनता पार्टी ने खूब धूम मचाई। सोशल मीडिया पर बनाई गई ये पार्टी देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गई। लाखों करोड़ों लोग इसे फॉलो करने लगे। अब इसके बाद एक ओर पार्टी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने इस पार्टी का गठन किया है।
जिस तरह से कॉकरोच जनता पार्टी के नाम ने लोगों को हैरान किया था उसी तरह से काटजू ने इश्क करो पार्टी बनाई है। इसमें अंतर यह है कि यह सरकार का विरोध नहीं कर रही बल्कि इसका उद्देश्य भारत के सामने मौजूद गंभीर समस्याओं से निपटने की कोशिश करना है। काटजू ने महुआ मोइत्रा को अपनी इस पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है।
काटजू ने बनाई इश्क करो पार्टी
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूर्व जस्टिस को सीजेपी की जमकर आलोचना करते हुए देखा गया। उन्होंने इसके संस्थापक अभिजीत दीपके को नीट परीक्षा में खामियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने पर मूर्ख कहा। किसी के साथ उन्होंने अपनी पार्टी के संबंध में भी जानकारी दी है। X पर अपने पोस्ट में उन्होंने कहा ‘लोग इस पार्टी को मजाक समझ सकते हैं। उन्हें लग सकता है कि यह लड़के और लड़कियों के बीच रोमांस को बढ़ावा देने के लिए एक तरह का वैलेंटाइन डे। लेकिन यह पूरी तरह से गलतफहमी है। भारत में बच्चों के कुपोषण, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं को लोगों के बीच एकता से ही दूर किया जा सकता है।’
Aims and objectives of Ishq Karo Party
By Justice Katju, patron of IKP
Some people may think that the formation of the newly created IKP is a joke, a kind of Valentine’s Day for promoting romance between boys and girls. But that is a total misconception.
In fact it is a very…— Markandey Katju (@mkatju) June 8, 2026
लोगों के प्रति प्रेम रखना चाहिए
काटजू ने कहा हमें नस्ल, धर्म और जाति का भेदभाव के बिना सभी लोगों के प्रति प्रेम रखना चाहिए। तभी हम आधुनिक सोच वाले नेताओं के नेतृत्व में एक शक्तिशाली जन संघर्ष चला सकते हैं ताकि लोगों को दयनीय स्थिति से मुक्ति दिलाई जा सके। उन्होंने सत्ता के लालच में डूबे नेताओं पर जनता की परवाह न करने का आरोप लगाया और कहा कि आईकेपी का मकसद बुराई से लड़ना और अपनों की एकता को बढ़ावा देना है।
सीजेपी की आलोचना
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर 6 जून को प्रदर्शन किया। काटजू ने पार्टी के विचारधारा और संस्थापक अभिजीत दीपके की आलोचना की है। वह यह कहते दिखाई दिए कि अभिजीत के मूर्ख होने का प्रमाण इस बात से स्पष्ट है कि उनकी प्रमुख मांगों में से एक भारत की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। अगर वह दिखा दे देते हैं तो उनकी जगह कोई दूसरा मंत्री आ जाएगा, इससे क्या फर्क पड़ेगा।






