दिल्ली में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की राष्ट्रीय अल्पसंख्यक एडवाइजरी काउंसिल की एक अहम बैठक में राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने भाजपा और आरएसएस की मौजूदा राजनीति पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि आने वाले समय में देश में हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा नहीं, बल्कि अमीरी और गरीबी के बीच असली लड़ाई लड़ी जाएगी। इस बैठक को कांग्रेस की आगामी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पार्टी ने अपनी दिशा स्पष्ट करने का प्रयास किया।
दरअसल इस महत्वपूर्ण बैठक में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ देशभर से 52 प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं ने हिस्सा लिया। इसमें कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी, सांसद इमरान मसूद, जैन समाज से सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, क्रिश्चियन समाज के प्रतिनिधि सांसद क्रिस्टोफर और सिख समाज से गुरदीप सप्पल जैसे विभिन्न समुदायों के वरिष्ठ नेता शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने बैठक में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार देता है और कांग्रेस की राजनीति इसी संवैधानिक सोच की बुनियाद पर खड़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी हमेशा संविधान के मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रही है।
हिंदू-मुस्लिम राजनीति अब खत्म: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि भाजपा और आरएसएस की “हिंदू-मुस्लिम राजनीति” अब अपने अंत की ओर बढ़ रही है। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि देश में बढ़ती महंगाई और विकराल होती आर्थिक असमानता अब सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है, जिसके सामने धर्म और जाति की राजनीति फीकी पड़ रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता के वास्तविक आर्थिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जनता अब समझदार हो चुकी है और असली समस्याओं को पहचान रही है। उनका यह बयान कांग्रेस की ओर से एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, जो आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीति का संकेत देता है।
सामाजिक असुरक्षा के मुद्दों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की
बैठक के दौरान देशभर में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों और सामाजिक असुरक्षा के मुद्दों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अल्पसंख्यक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्यों ने विभिन्न राज्यों से जुड़े मामलों को सामने रखा और इस बात पर जोर दिया कि इन मुद्दों के समाधान के लिए संगठित सामाजिक और राजनीतिक हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। सदस्यों ने एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया, ताकि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा और न्याय मिल सके।
इमरान प्रतापगढ़ी भी बैठक में शामिल रहे
इस बीच, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने भी बैठक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में देशभर से 52 प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं को बुलाया गया था ताकि अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अपनी चिंताएं साझा की जा सकें और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर ठोस चर्चा की जा सके। प्रतापगढ़ी ने अपने बयान में कहा कि हमारी कोशिश है कि देश में अल्पसंख्यक समुदाय एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करे और इसके माध्यम से संविधान तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई को और अधिक मजबूती मिले। यह एकजुटता ही देश को सही दिशा में ले जाएगी।
दरअसल कांग्रेस अब अपनी इस नई रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी 6 जून को एक बड़ा जॉइंट कन्वेंशन आयोजित करने जा रही है। यह महत्वपूर्ण कन्वेंशन कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग और शेड्यूल कास्ट विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होगा, जिसमें राहुल गांधी के शामिल होने की पूरी संभावना है। पार्टी इस आयोजन को एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रही है, जिसका केंद्र सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार और आर्थिक मुद्दे होंगे। यह कन्वेंशन यह दर्शाएगा कि कांग्रेस इन मुद्दों पर कितनी गंभीरता से काम करने को तैयार है और किस तरह से वह देश की दिशा तय करना चाहती है।






