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फारूक अब्दुल्ला की बढ़ी मुश्किलें, JKCA स्कैम मामले में कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, जानें पूरा मामला

Written by:Gaurav Sharma
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जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) घोटाले में सुनवाई के लिए पेश न होने पर श्रीनगर की एक अदालत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। यह आदेश जम्मू में उन पर हुए कथित हमले के ठीक एक दिन बाद आया।
फारूक अब्दुल्ला की बढ़ी मुश्किलें, JKCA स्कैम मामले में कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, जानें पूरा मामला

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में श्रीनगर की एक अदालत ने गुरुवार को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब अब्दुल्ला आरोप तय करने के लिए निर्धारित सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए।

श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने फारूक अब्दुल्ला की व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी को खारिज कर दिया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह जम्मू में हैं और कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकते। अदालत ने पाया कि बचाव पक्ष को वर्चुअल माध्यम से अब्दुल्ला की उपस्थिति सुनिश्चित करने का विकल्प दिया गया था, लेकिन वकील ने यह कहते हुए मना कर दिया कि आरोपी न तो शारीरिक रूप से और न ही वर्चुअली उपस्थित हो सकते हैं।

इस दलील को अस्वीकार करते हुए अदालत ने छूट की अर्जी खारिज कर दी और अब्दुल्ला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की गई है।

क्या है JKCA घोटाला मामला?

यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के अध्यक्ष के रूप में फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान हुए कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2018 में इस मामले में चार्जशीट दायर की थी।

आरोप है कि 2002 से 2011 के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा राज्य में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए दिए गए 100 करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान में से 43.69 करोड़ रुपये का गबन किया गया। सीबीआई के अनुसार, यह रकम एसोसिएशन के अधिकारियों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी तरीके से लेनदेन कर निकाली।

इस मामले में फारूक अब्दुल्ला के अलावा एसोसिएशन के कई पूर्व पदाधिकारियों पर आपराधिक साजिश और विश्वास के आपराधिक हनन के आरोप हैं। 2015 में एक जनहित याचिका के बाद जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। हालांकि, फारूक अब्दुल्ला हमेशा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए किसी भी गलत काम से इनकार करते रहे हैं।

एक दिन पहले हुआ था कथित हमला

यह वारंट उस घटना के ठीक एक दिन बाद जारी हुआ है जब बुधवार को जम्मू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने कथित तौर पर फारूक अब्दुल्ला पर गोली चलाने की कोशिश की थी। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को तुरंत पकड़ लिया और अब्दुल्ला सुरक्षित बच गए। पुलिस इस हमले के पीछे के मकसद की जांच कर रही है।

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