पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विधानसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद अब उनकी करीबी मानी जाने वाली सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे को ममता बनर्जी के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि काकोली घोष दस्तीदार ने अपने इस्तीफे के पीछे पश्चिम बंगाल में बढ़ते अन्याय और भ्रष्टाचार को लेकर जनता की बढ़ती चिंताओं का हवाला दिया है।
चार बार की टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में हाल के घटनाक्रमों ने आम लोगों के बीच गंभीर सवाल खड़े किए हैं और पार्टी का नेतृत्व अब इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता है। उन्होंने राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही, अनुशासन और प्रतिबद्धता के महत्व पर विशेष जोर दिया। काकोली घोष दस्तीदार ने यह भी कहा कि जिले में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी का खराब प्रदर्शन सीधे तौर पर जनता के बदलते मिजाज को दर्शाता है। इस चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने जिलाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की अपनी इच्छा जाहिर की।
काकोली घोष दस्तीदार ने पुराने कार्यकर्ताओं को महत्व देने की उठाई मांग
वरिष्ठ टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से एक बार फिर अनुभवी और समर्पित पुराने कार्यकर्ताओं को महत्व देने का आग्रह किया। उनका मानना था कि एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा ही पार्टी की छवि को सुधारने और जमीनी स्तर पर समर्थकों के साथ फिर से जुड़ने में मदद कर सकता है। यह बयान पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह की ओर भी इशारा करता है।
यह पहला मौका नहीं है जब काकोली घोष दस्तीदार ने अपनी नाराजगी जाहिर की हो। उन्हें पहले ही लोकसभा के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने उस समय लिखा था, “मुझे आज चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।” इसके बाद, काकोली के घर के सामने केंद्रीय बल की सुरक्षा बढ़ने से राजनीतिक गलियारों में अटकलें और भी तेज हो गई थीं। इन सब घटनाक्रमों के बीच, काकोली ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने नॉर्थ 24 परगना के जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।
नए नेताओं पर काकोली घोष दस्तीदार का तीखा हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, काकोली घोष दस्तीदार ने नए नेताओं के खिलाफ भी अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, “2011 के बाद शहद इकट्ठा करने आए नेता फेसबुक पर जो कह रहे हैं, वह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्हें नहीं पता कि वे किसके बारे में बात कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में जो शान-शौकत और अपारदर्शिता आई है, वह उससे सहमत नहीं हैं। काकोली ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “मेरी अलग-अलग स्तर पर आलोचना हुई है। मुझे इस शान-शौकत की आदत नहीं है। मैं एक मिडिल-क्लास जिंदगी जीती हूं।”
रविवार को ही ममता बनर्जी ने दावा किया था कि भाजपा ने वोट चुराकर जीत हासिल की है, लेकिन काकोली घोष दस्तीदार ने उनकी इस थ्योरी को लगभग खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “करप्शन हुआ है। बेईमानी हुई है। पार्टी के नेता घमंडी हो गए हैं। लोग इसे स्वीकार नहीं करते। लोग समझ गए हैं कि लोकतंत्र में आप जो चाहें वो नहीं कर सकते।” यह बयान तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर करता है और पार्टी के लिए आने वाले दिनों में और चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
काकोली के इस्तीफे पर TMC की चुप्पी बरकरार
काकोली के इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने इसे पार्टी का अंदरूनी मामला बताया। उन्होंने कहा, “उन्होंने इस्तीफा दिया है या नहीं, इस पर अभी कोई कमेंट नहीं करेंगे। जब पार्टी कहेगी तो हम आपको बता देंगे।” यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देती है कि पार्टी इस मामले पर खुलकर बात करने से बच रही है।
एक सक्रिय राजनीतिज्ञ होने के अलावा, काकोली घोष दस्तीदार पेशे से एक जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ भी हैं। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और बाद में लंदन में ऑब्स्टेट्रिक अल्ट्रासाउंड में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह स्वास्थ्य सेवा और महिलाओं के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए जानी जाती हैं। वह पहले तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक भी रह चुकी हैं, जो राजनीति में उनके लंबे और महत्वपूर्ण अनुभव को दर्शाता है।






