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सावन में करें भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के दर्शन, जानें पौराणिक मान्यता!

Written by:Sanjucta Pandit
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लोग इस महीने में उन मंदिरों की तलाश में रहते हैं जो भगवान शिव के रहस्यों से भरे हुए हों। ऐसे में यदि आप भी कोई ऐसे ही धार्मिक स्थल की तलाश में हैं, तो आज का आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद होने वाला है।
सावन में करें भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव के दर्शन, जानें पौराणिक मान्यता!

सावन का महीना हिंदू कैलेंडर में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इस महीने में चारों ओर हरियाली नजर आती है। इस पावन अवसर पर भक्तगण अपने प्रिय भगवान शिवा की भक्ति में लीन नजर आते हैं। पूरा शहर आध्यात्मिक भावनाओं में डूबा हुआ नजर आता है, हर गली मोहल्ले में स्थित शिव के मंदिरों को फूल और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है, जहां सुबह और शाम उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। यहां श्रद्धालुओं की सुबह से ही काफी अधिक मात्रा में भीड़ लगी होती है। यह महीना बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने का माना जाता है, जब लोग अपने कंधे पर कावड़ में जल भरकर लाते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।

धार्मिक शास्त्रों की मानें, तो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं। इन सभी का अपना अलग-अलग महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि इन 12 ज्योतिर्लिंगों में जाकर भगवान के दर्शन करने पर व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है, उन्हें सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए लोग अपने पूरे जीवनकाल के दौरान इन 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान के अलौकिक दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

आज हम आपको इन्हीं में से एक भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में बताएंगे, जो कि महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्री पर्वत पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव की शक्ति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। इसे लोग मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते हैं। इस मंदिर का महत्व बहुत अधिक है, और इसका रहस्य भी उतना ही अधिक पुराना है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण के भाई कुंभकरण का पुत्र भी बहुत ही ज्यादा अत्याचारी बन गया था। ऐसे में वह भगवान श्रीराम से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेना चाहता था। इसलिए उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। उन्हें प्रसन्न करके उसने कई सारे वरदान प्राप्त किए। फिर अजय होकर उसने राजा सूदक्षिण को बंदी बना लिया। इससे छुटकारा पाने के लिए राजा ने भी पार्थिव लिंग बनाकर भगवान शिव की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। उसकी तपस्या से भगवान शिव बहुत ही ज्यादा खुश हो गए। वहीं, जब राक्षस राजा को मारने पहुंचा, तब भगवान शिव वहां प्रकट हुए और भीम से युद्ध करते हुए उसका वध कर दिया। तब देवी-देवताओं ने महादेव से आग्रह किया कि वह इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करें, जिसे बाबा भोलेनाथ ने मान लिया। तब से इस जगह पर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से शिवलिंग की स्थापना हुई।

ऐसी मान्यता है कि आज भी भगवान शिव यहां पर वास करते हैं, जिनके यहां होने का कई बार स्थानीय लोगों को आभास भी हुआ है। यह मंदिर भीमा नदी के किनारे बसा हुआ है।

अन्य पौराणिक कथा

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, जब त्रेता युग में भगवान शिव और त्रिपुरासुर राक्षस के बीच युद्ध हुआ, तब वहां इतनी गर्मी हुई कि भीमा नदी सूख गई। तब भगवान शिव के पसीने से इस नदी में फिर से पानी आया था।

ऐसे पड़ा मोटेश्वर महादेव का नाम

स्थानीय लोगों की ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहां पर सच्चे मन से कामना पूर्ति के लिए आते हैं, भगवान उनकी जरूर सुनते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की खासियत है कि आकार में यह बहुत ही बड़ा है, साथ ही बहुत ही मोटा भी है। इसलिए लोग इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते हैं।

आप भी जाएं

यदि आप भी सावन में ज्योतिर्लिंग जाना चाहते हैं, तो आप पुणे से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग जा सकते हैं। यहां जाकर आपको आध्यात्मिक शांति मिलेगी, साथ ही आपको मानसिक सुकून भी मिलेगा, जिससे आपकी सारी चिंताएं और कष्ट दूर हो जाएंगे।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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