मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर बड़े हमले किये हैं, उन्होंने आज मीडिया में छपी ख़बरों के आधार पर प्रदेश सरकार को घेरा है, सिंघार ने सीएसआर फंड, औद्योगिक प्रदेश के दावों, करोड़ों रुपये के गेहूं के बर्बाद होकर जहरीले होने, अस्पतालों के कायाकल्प पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है

उमंग सिंघार ने करोड़ों रुपये कीमत के गेहूं की बर्बादी पर आक्रोश जताया है और राज्य सरकार से सवाल किये हैं उन्होंने X पर लिखा- ” भोपाल में 35 करोड़ का गेहूं, किराया और कीटनाशक के नाम पर 150 करोड़ तक पहुंचाया गया और आखिरकार सड़कर ज़हर बन गया यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार और जनता के पैसे की खुली लूट है, जिस अनाज से गरीबों का पेट भरना था, उसे गोदामों में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। हालात इतने बदतर कि अब यह पशुओं के लायक भी नहीं बचा क्या यह सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है?

कांग्रेस नेता ने लिखा- “अधिकारियों की चेतावनियों के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई, यह सीधे-सीधे मिलीभगत और जिम्मेदारों की संरक्षण नीति को दर्शाता है। अब इस घोटाले की भरपाई कौन करेगा? मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस सम्पूर्ण विषय को संज्ञान में लें एवं उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित कर, जनता की मेहनत की कमाई का हिसाब लिया जाए।”

सरकार के औद्योगिक प्रदेश के दावों पर कांग्रेस का हमला 

सिंघार ने लिखा- “दो दशकों से सत्ता में काबिज़ भाजपा सरकार प्रदेश को “औद्योगिक प्रदेश” बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है,लेकिन हकीकत में उद्योग घट रहे हैं। संसद सत्र में सरकार ने खुद स्वीकार किया कि वित्तीय वर्ष 2023–24 में पूरे देश में कंपनियों ने ₹34,000 करोड़ का CSR फंड खर्च किया, जबकि मध्य प्रदेश को सिर्फ ₹600 करोड़ ही मिले, जो पिछले साल ₹668 करोड़ था, यानी ₹68 करोड़ की गिरावट है।”

उन्होंने लिखा- ” कंपनी अधिनियम 2013 के तहत प्राइवेट कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का 2% CSR फंड के रूप में खर्च करना अनिवार्य है,जो शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में लगाया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश को ओडिशा और उत्तर प्रदेश से भी कम CSR फंड मिला, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों को ₹6,000 करोड़ तक प्राप्त हुए। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि प्रदेश में उद्योग बढ़ नहीं रहे, बल्कि घट रहे हैं और कंपनियों का मुनाफा नहीं, बल्कि गिरावट सामने आ रही है।”

नेता प्रतिपक्ष ने आगे लिखा- ” इसके बावजूद भाजपा नेता रैलियों में झूठे प्रचार के माध्यम से प्रदेश को औद्योगिक प्रदेश बताने में लगे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि CSR फंड का लगभग 80% हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में जाता है, जो सीधे तौर पर गरीब, कमजोर और पिछड़े वर्गों को प्रभावित करता है। जब प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा पहले से ही निजी हाथों में सिमट रहे हैं, और अब CSR फंड भी घट रहा है तो इन मूलभूत क्षेत्रों का भविष्य क्या होगा?

अस्पतालों के कायाकल्प पर कांग्रेस ने किये सवाल 

उमंग सिंघार ने अस्पतालों के कायाकल्प पर भी सरकार को घेरा, उन्होंने लिखा- “भोपाल के सरकारी अस्पतालों में “कायाकल्प” सिर्फ कागज़ों और दिखावे तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत जानलेवा है। बिना इलेक्ट्रिसिटी सर्टिफिकेट अस्पताल चल रहे हैं, जगह-जगह खुले तार और शॉर्ट सर्किट का खतरा है यह सीधा-सीधा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।”

सिंघार ने कहा- “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान के साथ किया जा रहा अपराध है। जहां मरीजों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, वहां उन्हें खतरे के बीच इलाज लेने को मजबूर किया जा रहा है। यह भाजपा के तथाकथित सुशासन की सच्चाई है। लगातार स्वास्थ्य विभाग की गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं जिम्मेदारों की लापरवाही से नागरिक अपनी जान गवाँ रहे हैं फिर भी सरकार नहीं जागी, प्रदेश की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।