भोपाल के मिंटो हॉल में सलमान खान और जैकलीन फर्नांडिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बात का खुलासा किया कि कैसे आईफा अवार्ड मध्यप्रदेश की धरती पर करने का सपना साकार करने का मन हुआ। कमलनाथ ने बताया कि जब इंदौर में राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव हुआ तब उन्हें किसी ने सलाह दी कि आइफा भी मध्यप्रदेश में कराया जा सकता है तब आइफा का नाम सुनकर कमलनाथ को लगा कि यह शायद फुटबॉल का कोई टूर्नामेंट है। लेकिन जब उन्हें यह पता चला कि यह तो फिल्म का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव है तो आइफा के लोगों के साथ कमलनाथ को अपने संबंध याद आए। कमलनाथ ने बताया कि जब भी 2004 में वाणिज्य मंत्री थे तब आइफा के लोग उनके संपर्क में थे और उन्हीं संपर्कों का आधार बनाकर उन्होंने इंदौर में आइफा कराने का प्रस्ताव आईफा के संचालकों को दिया। कमलनाथ ने कहा कि वै मध्य प्रदेश की अलग पहचान बनाना चाहते हैं और इस नाते आइफा जैसे अवार्ड मील का पत्थर साबित होंगे ,यह साफ तौर पर दिखता है। कमलनाथ आगे बोले कि मध्यप्रदेश में ना तो समुद्र है ,ना बर्फ है लेकिन यहां पर खूबसूरत जंगल ,खूबसूरत पर्यटन और सबसे बड़ी बात यहां के सीधे-साधे लोग हैं।
कमलनाथ ने सुनाई आइफा को मध्य प्रदेश लाने की कहानी
Written by:Gaurav Sharma
Published:
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






