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सहारा इंडिया पर MP में जमीन घोटाले के गंभीर आरोप, EOW ने शुरु की जाँच, समाजवादी पार्टी का आरोप ‘हवाला से हुआ 250 करोड़ का लेनदेन’

Written by:Shruty Kushwaha
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समाजवादी पार्टी फरवरी के पहले सप्ताह में कटनी में इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। सहारा के जिन निवेशकों का पैसा कंपनी में फंसा हुआ है, उन्हें लेकर सपा एक आंदोलन करेगी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगी। इसी क्रम में जबलपुर और फिर भोपाल में भी आंदोलन किया जाएगा। सपा ने कहा कि जब तक इस मामले में पूरा न्याय नहीं हो जाता है, वो आंदोलन जारी रखेंगे।
सहारा इंडिया पर MP में जमीन घोटाले के गंभीर आरोप,  EOW ने शुरु की जाँच, समाजवादी पार्टी का आरोप ‘हवाला से हुआ 250 करोड़ का लेनदेन’

Sahara India Land Scam Allegations in MP : समाजवादी पार्टी ने सहारा इंडिया पर मध्यप्रदेश में ज़मीन घोटाले का आरोप लगाया था और कुछ दिन पहले इसे लेकर एक प्रेसवार्ता भी की थी। इसके बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस मामले में जाँच की कार्रवाई शुरु कर दी है। इसके बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने इस मुद्दे को उठाने के लिए मीडिया का धन्यवाद जताया है। साथ ही ईओडब्ल्यू से निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसी के साथ समाजवादी पार्टी ने कटनी, जबलपुर और भोपाल में सहारा के निवेशकों के साथ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा भी की है।

मनोज यादव ने कहा कि ये बड़ा घोटाला है जहां एक हज़ार करोड़ की ज़मीन सिर्फ नब्बे करोड़ में खरीदी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इनकी खरीद रद्द कराकर जमीनों की नीलामी की जाती है तो ये पांच सौ से छह सौ करोड़ में बिकेगी। ये पैसा उन निवेशकों को वापस किया जा सकता है, जो अरसे से सहारा में अटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ज़मीन खरीद में काफी अनियमितताएं हुई हैं और रजिस्ट्री भी गलत तरीके से की गई है।

सपा ने EOW से की निष्पक्ष जांच की माँग 

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि उन्हें गुप्त सूत्रों से पता चला है कि जमीनों की रजिस्ट्री में लगभग ढाई सौ करोड़ का हवाला के ज़रिए लेनदेन किया गया है और ईओडब्ल्यू को इसकी भी जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 310 एकड़ की महंगी जमीनों को सस्ते में खरीदने के लिए भारी घूस दी गई है और ये पैसा किसके पास गया है, ईओडब्ल्यू इसकी जांच करेगी तो सारी असलियत सामने आ जाएगी।

समाजवादी पार्टी द्वारा सहारा इंडिया पर लगाए गए आरोप

1. सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जिसे संक्षेप में सहारा कहा जाता है) ने आम जनता से राशि एकत्र कर देश के विभिन्न शहरों में सहारा सिटी बनाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में सहारा कंपनी द्वारा जमीनें खरीदी गई थी ।

2. इसके बाद सहारा कंपनी को आम निवेशकों की राशि ब्याज सहित वापस करने हेतु भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) एवं माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सहारा कंपनी को निर्देश जारी किये गये जिसके अनुक्रम में वर्ष 2014 में सहारा कंपनी के अधिवक्ता ने माननीय उच्चतम न्यायालय में एक मूल्याकंन रिपोर्ट प्रस्तुत कर ततसमय देश के नौ शहरों की अपनी संपत्तियों को विक्रय करने की न्यायालय से अनुमति मांगी ताकि सहारा कंपनी उक्त संपत्तियों को विक्रय कर उससे प्राप्त होने वाली राशि से आम निवेशकों का पैसा वापस कर सकें । सहारा कंपनी द्वारा वर्ष 2014 में माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत उपरोक्त सूची में सहारा कंपनी की भोपाल के मक्सी स्थित 110 एकड़ जमीन की कीमत 125 करोड़ रूपये बताई गई।

3. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने आदेश दिनांक 04.06.2014 में स्पष्ट तौर पर आदेशित किया गया था कि सहारा समूह की कंपनियों के स्वामित्व वाली अचल संपत्तियों को उन कंपनियों/अन्य संस्थानों द्वारा बेचा जा सकता है जिनके नाम पर ऐसी संपत्तियां हैं, बशर्ते कि ऐसी बिक्री इस न्यायालय के समक्ष दायर बयान में दर्शाये गये अनुमानित मूल्य या उस क्षेत्र के लिये निर्धारित सर्किल दरों से कम कीमत पर न हो, जिसमें ऐसी संपत्तियां स्थित हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने आदेश में यह भी निर्देशित किया गया था कि विक्रेता इस न्यायालय को बेची गई संपत्तियों के मूल्याकंन और बिक्री की शर्तों का विवरण प्रस्तुत करेगा । माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा साथ ही यह भी निर्देशित किया गया था कि बिक्री मूल्य जमा करने पर ही संपत्ति के स्वामित्व विलेख सेबी द्वारा क्रेता (ओं) के पक्ष में जारी किये जायेंगे।

4. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पूर्व में पारित आदेश दिनांक 04.06.2014 के द्वारा उपरोक्त संपत्तियों को विक्रय करने की अनुमति इस शर्त के साथ प्रदान गई थी कि विक्रय से प्राप्त होने वाली राशि क्रेता द्वारा सीधे बैंक ऑफ इंडिया, बांद्रा-कुर्ला ब्रांच, मुंबई महाराष्ट्र के सेबी-सहारा रिफंड खाता नंबर 012210110003740 में ही जमा की जायेगी।

5. इसके पश्चात सहारा कंपनी के आवेदन पर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 11.07.2016 के द्वारा पूर्व में पारित अपने आदेश में आशिक संशोधन करते हुये यह निर्देश दिये गये कि ऐसी बिक्री उस क्षेत्र के लिये निर्धारित सर्किल दरों के 90 प्रतिशत से कम कीमत पर नहीं हो जिसमें संपत्तियां स्थित है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह भी आदेशित किया कि सहारा द्वारा वसूल की गई बिक्री की राशि कीमत सेबी-सहारा रिफडं खाते में ही जमा की जायेगी।

6. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सहारा के आम निवेशकों के हितों को दृष्टिगत रखते हुये पारित आदेश का यहां से संजय पाठक जैसे लोगों ने अपने निजी लाभ के लिये उपयोग करना शुरू कर दिया जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि भोपाल के मक्सी में स्थित सहारा की लगभग 110 एकड़ जमीन जिसकी कीमत स्वय संहारा कंपनी ने वर्ष 2014 में माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष 125 करोड़ रूपये लिखित में बताई थी भोपाल की वही 110 एकड़ जमीन को सहारा के भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा संजय पाठक से मिलीभगत कर अवैध लाभ लेकर वर्ष 2022 में मात्र लगभग 48 करोड़ रूपये में विक्रय कर दिया गया।

7. सहारा की भोपाल स्थित 110 एकड़ जमीन के विक्रय के संबंध में यहां इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बावजूद भी क्रेता कंपनी मेसर्स सिनाप रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उक्त राशि सीधे सेबी-सहारा रिफंड बैंक अकाउंट में जमा नहीं की गई। भोपाल की जमीन के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि जब माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश प्रदान किये गये थे कि बिक्री मूल्य जमा करने पर ही संपत्ति के स्वामित्व विलेख सेबी द्वारा क्रेता (ओ) के पक्ष में जारी किये जायेंगे तो सेबी द्वारों भोपाल की जमीन के स्वामित्व विलेख संजय पाठक के परिवार की कंपनी मेसर्स सिनाप रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को कैसे जारी कर दिये गये? और यदि जारी नहीं किये गये हैं तो भोपाल की सहारा कंपनी की जमीन का नामान्तरण कैसे संजय पाठक के परिवार की कंपनी मेसर्स सिनाप रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हो गया ?

8. भोपाल की जमीन के संबंध में इस बात का उल्लेख करना भी आवश्यक है कि उक्त जमीन के खसरों के कॉलम नंबर 12 कैफियत में नामांतरण के तीन प्रकरण क्रमांकों क्रमश रा०प्र०सं० 4294/31-6/2021-22. प्रकरण क्रमांक/4295/31-6/2021-22 एवं प्रकरण क्रमांक 4296/3-6/2021-22 आदेश दिनांक 16.09.2022 द्वारा भू-अभिलेख अद्यतित करने का उल्लेख है जबकि आर०सी०एम०एस० पोर्टल के माध्यम से उक्त प्रकरणों की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने पर उक्त तीनों प्रकरण तहसीलदार तहसील कोलार जिला भोपाल द्वारा दिनांक 28.07.2022 एवं 29.07.2022 को प्रकरण खारिज करते हुये नस्तीबद्ध किये जाने का आदेश पारित किया गया था।

9. इसी प्रकार सहारा की जबलपुर जिले की लगभग 100 एकड़ जमीन वर्ष 2023 में मात्र लगभग 20 करोड़ रूपये में संजय पाठक के परिवार की कंपनी मेसर्स नायसा देवबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा क्रय की गई जिसकी कीमत वर्ष 2023 में भी लगभग 200 करोड़ रूपये थी।

10. इसी प्रकार सहारा की कटनी जिले की लगभग 100 एकड जमीन वर्ष 2023 में मात्र 22 करोड़ रूप्ये में संजय पाठक के परिवार की कंपनी नायसा देवबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा क्रय कर ली गई जिसकी कीमत वर्ष 2023 में भी लगभग 200 करोड़ रूपये थी। जिसका कलेक्टर कटनी द्वारा आज दिनांक तक क्रेता कंपनी के नाम पर राजस्व अभिलेखों में नामान्तरण नहीं किया गया है क्योंकि कटनी की सहारा की जमीन के खसरों के कॉलम नंबर 12 कैफियत में पूर्व कलेक्टर कटनी द्वारा पत्र क्रमांक/295/रीडर कले/2021 द्वारा विक्रय से प्रतिबंधित किया गया था।

11. विचारणीय प्रश्न ये है कि सहारा कंपनी के अधिकारियों द्वारा उक्त जमीनों को अवैध लाभ लेकर चोरी छिपे मात्र 90 करोड़ रूपयों में संजय पाठक के परिवार की कंपनियों को विक्रय कर दिया गया है जबकि सहारा कपनी की उक्त जमीनों को यदि नीलामी के माध्यम से विक्रय किया गया होता तो उक्त जमीनों की वास्तविक कीमत जो लगभग 1000 करोड़ रूपये है कपंनी को प्राप्त होती और आम निवेशकों को 1000 करोड़ रूपये वापस प्राप्त होते।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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