अतुल सक्सेना/ग्वालियर। हजीरा क्षेत्र में रहने वाले एक श्रीवास्तव परिवार की खुशियाँ आज उस समय मातम में बदल गई जब उनके घर के मासूम की अचानक मौत की खबर उन्हें मिली। जानकारी के मुताबिक रविवार होने के कारण कोटा वाला मोहल्ले के कुछ बच्चे पास से बह रहे स्वर्ण रेखा नाले की सूखी जमीन पर क्रिकेट खेल रहे थे। इसी बीच उनकी गेंद नाले में चली गई। गेंद लेने के लिए क्रिकेट खेल रहा 7 साल का रचित श्रीवास्तव दौड़ा लेकिन उसका पर स्लिप हो गया और वो नाले में गिर गया। नाला करीब 5 फीट गहरा था और बहाव भी तेज था, जिसके चलते कुछ ही पल में बच्चा गायब हो गया। साथ खेल रहे बच्चों ने शोर मचाया, लोग दौड़े, एक युवक बचाने के लिए नाले में उतरा तब तक बच्चा बह गया। पुलिस और नगर निगम को फोन किया गया। नगर निगम की रेस्क्यू टीम ने नाले मे उतरकर खोज शुरू की तब कहीं एक किलोमीटर दूर बच्चे का शव बरामद हो पाया। ग्वालियर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर शव को पीएम के लिए भेज दिया है। बच्चे की मौत के बाद पूरे मोहल्ले में मातम पसरा है और रचित के साथ खेलने वाले उसके दोस्त गुमसुम हैं।
नाले में गिरकर मासूम की मौत, गेंद निकालने की कोशिश में गंवाई जान
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






