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कभी गुलाबी कभी सुर्ख ठंड की ज़द में प्रदेश

Written by:Gaurav Sharma
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कभी गुलाबी कभी सुर्ख ठंड की ज़द में प्रदेश

भोपाल। फरवरी का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है और अब भी प्रदेश में सर्दी का मौसम धूप-छांव का खेल खेल रहा है। दोपहर में जहां धूप के मिजाज से लगता है कि सर्दियां अलविदा कह रही है, लेकिन सुबह और शामें अब भी खासी ठंडक लिये हुए है। वहीं शनिवार को प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में कहीं कहीं हल्की बौछारें भी पड़ी। इससे पहले शुक्रवार को देर शाम उत्तर पूर्वी हवाएं चलने से न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इस वजह से भोपाल और आसपास के इलाकों में शनिवार के दिन खासी ठंडक महसूस की गई।

पिछले 24 घंटे में होशंगाबाद, शहडोल और जबलपुर के समीपवर्ती इलाकों में कहीं कहीं बारिश हुई। होशंगाबाद, सागर,रीवा व इंदौर संभागों में सामान्य से कम तथाशेष संभागों में न्यूनतम तापमान सामान्य दर्ज किया गया। रीवा में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया। वहीं राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकत तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अभी कुछ दिन और प्रदेश में ठंड का असर बरकरार रहेगा।  

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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