बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने BJP पर सीधे सवाल दागे हैं और कहा है कि यह फैसला जनता की अपेक्षाओं के खिलाफ है।
मनोज कुमार ने पटना में कहा कि अगर BJP सच में बिहार और उसके जनादेश का सम्मान करना चाहती है, तो नीतीश कुमार को केंद्र में बड़ा दायित्व दिया जाए। उन्होंने डिप्टी PM या गृह मंत्री जैसे पद का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ राज्यसभा भेजना पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
“अगर बीजेपी को सच में सम्मान की पड़ी है तो नीतीश कुमार को डिप्टी पीएम या फिर गृह मंत्री बना दे। मुख्यमंत्री से हटाकर राज्यसभा भेजना बिहार का अपमान है।” — मनोज कुमार, कांग्रेस सांसद
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि जनता से पांच साल के लिए बहुमत मांगा गया था और चुनाव के दौरान नीतीश कुमार को ही नेतृत्व का चेहरा बताया गया। उनके मुताबिक, ऐसे में अचानक राजनीतिक भूमिका बदलना जनादेश की भावना से मेल नहीं खाता।
202 सीटों का हवाला, जनादेश पर कांग्रेस का सवाल
मनोज कुमार ने दावा किया कि बिहार की जनता ने NDA को नीतीश कुमार के चेहरे पर 202 सीटें दीं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जीत के बाद अगर वही नेता राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर राज्यसभा जाते हैं, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक फेरबदल नहीं, बल्कि भरोसे के संकट की तरह देखी जा रही है। कांग्रेस सांसद ने अपने बयान में यह भी कहा कि विपक्ष होने के नाते उनकी पार्टी इस मुद्दे पर लगातार जवाब मांगती रहेगी।
“चुनाव में उन्हें नेता बताया गया, फिर अब राज्यसभा क्यों? जनता से बहुमत किस वादे पर लिया गया था, इसका जवाब मिलना चाहिए।” — मनोज कुमार, कांग्रेस सांसद
अपने बयान में मनोज कुमार ने यह भी कहा कि पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या में JDU कार्यकर्ताओं के उतरने का दावा किया जा रहा है और वे इस फैसले से दुखी बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता नहीं चाहते कि नीतीश कुमार बिहार से दिल्ली की राजनीति में शिफ्ट हों।
BJP का पक्ष: निर्णय नीतीश कुमार की इच्छा से
कांग्रेस के आरोपों के बीच BJP की ओर से यह कहा गया कि नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से राज्यसभा जाने का फैसला चुना है। पार्टी का कहना है कि वह मुख्यमंत्री के निर्णय का सम्मान करती है।
इसी दावे पर पलटवार करते हुए मनोज कुमार ने कहा कि अगर निर्णय के सम्मान की बात है, तो सम्मान प्रतीकात्मक नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, बड़ा जनादेश पाने वाले नेता को केंद्र में प्रभावी पद देकर ही राजनीतिक संदेश स्पष्ट होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद की चर्चा व्यावहारिक नहीं है, लेकिन डिप्टी PM या गृह मंत्रालय जैसा दायित्व दिए जाने पर बिहार की जनता को यह महसूस होगा कि उसके जनादेश और उसके नेता दोनों का मान रखा गया है।
‘जनता के साथ धोखा’ से लेकर ‘अन्याय’ तक, बयान की तीखी भाषा
कांग्रेस सांसद के बयान में भाषा भी काफी तीखी रही। उन्होंने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को बिहार के लोगों के साथ अन्याय बताया और कहा कि यह जनता की उम्मीदों के खिलाफ कदम है। उन्होंने बार-बार इस मुद्दे को जनादेश बनाम राजनीतिक निर्णय के रूप में रखा।
मनोज कुमार ने कहा कि यह सिर्फ सत्ता की अंदरूनी व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक वादे का सवाल है जो चुनावी मंचों से जनता के सामने रखा गया था। उन्होंने कहा कि जनता के मन में उठ रहे सवालों के स्पष्ट उत्तर आने चाहिए।
राज्यपाल बदलाव पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
इसी दौरान कई राज्यों में राज्यपाल बदले जाने के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि इस पर जवाब BJP के शीर्ष नेतृत्व को देना चाहिए कि बदलाव किन कारणों से किए गए।
पश्चिम बंगाल में नए राज्यपाल की नियुक्ति पर अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि राज्यपाल से इस्तीफा देने को कहा गया और उसके बाद उन्हें भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जो कहेगी, उसके अनुसार काम होगा, लेकिन बंगाल की राजनीति में BJP को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।
बिहार में फिलहाल केंद्र बिंदु नीतीश कुमार की अगली भूमिका ही बनी हुई है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनादेश से जोड़कर सवाल कर रही है, जबकि BJP इसे नेतृत्व का स्वैच्छिक निर्णय बता रही है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत हैं, खासकर तब जब विपक्ष इसे राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।






