इंदौर, आकाश धोलपुरे। इंदौर जल्द ही देश मे एक बड़े प्लास्टिक हब के रूप में उबरने वाला है। दरअसल, चायना के उत्पादों के बहिष्कार के बाद से ही देशभर में अब लोकल मार्केट और उद्योगों को स्थापित करने के लिए देशभर में मुहिम छिड़ चुकी है और ऐसे में इंदौर प्लास्टिक उद्योगों का हब बनाने के लिए वर्षो से प्रयासरत इंडियन प्लास्ट पैक फोरम को बड़ी सफलता मिली जिस पर मध्यप्रदेश सरकार ने सहमति भी दे दी है। दरअसल, प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को जल्द ही औद्योगिक क्षेत्र में एक नई सौगात मिलने जा रही है और इसी सिलसिले में इंदौर पहुंचे एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा से आईपीपीएफ का प्रतिनिध मंडल मिला था।
प्रदेश में औद्योगिक सुविधाओं को बढाने के लिए प्लास्टिक उद्योग द्वारा लम्बे समय से इंदौर में सीपेट का सेंटर खोलने की मांग की जा रही है। इस दिशा में सोमवार को इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के प्रतिनिधिमंडल ने सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा से मुलाकात की और इंदौर में सीपेट सेंटर की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया जिसके बाद प्रदेश के मंत्री ने तत्काल सीपैट सेंटर की इंदौर में स्थापना करने की जरूरत को स्वीकारा और 10 एकड लैंड के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। वही मंत्री सखलेचा ने प्रतिनिधि मंडल से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। बता दे कि प्रदेश के एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा के इंदौर प्रवास के दौरान रेसिडेंसी कोठी में इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात कर इस इंदौर में CIPET सेंटर खोलने हेतु जमीन आवंटन के लिए निवेदन किया था जिसकी आवश्यकता और उपयोग को जान कर मंत्री सखलेचा ने जमीन उपलब्ध करवाने की मांग मान ली और साथ ही सेंटर के निर्माण और स्थापना से संबधित अन्य जानकारी के साथ विस्तृत रिपोर्ट देने की बात कही। जिसे जल्दी ही आईपीपीएफ द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
एसोसिएशन अध्यक्ष श्री सचिन बंसल ने बताया कि प्लास्टिक उद्योगों के लिए Central Institute of Plastics Engineering and Technology का सेंटर वर्तमान में मप्र में मात्र भोपाल और ग्वालियर में है। ऐसे में किसी भी उत्पाद की प्रमाणिकता के लिए वही जाना होता है। इंदौर में सेंटर की स्थापना होने पर उद्योगों को सुविधा के साथ ही युवाओं को रोजगार देने वाले कोर्स प्रारंभ हो सकेगें और प्रदेश में नए अवसर मिलेगें। इस सेंटर को पब्लिक प्राइवेट मॉडल के रूप में संचालन किया जाएगा। उन्होनें बताया कि इस दिशा में केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल डिपाटमेंट के द्वारा पहले ही अपनी स्वीकृति जा चुकी है और इस संबध में प्रमुख सचिव इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट पॉलिसी को पत्र भी लिखा जा चुका है । इंदौर में की जा रही इस पहल के बाद अब ये माना जा रहा है कि प्लास्टिक उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ ही नए मार्केट का सृजन होगा और युवाओ के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।






