हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। और अब लोग डिजिटल अरेस्ट नामक साइबर अपराध का शिकार होने लगे हैं। बीते तीन वर्षों में प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के 14 मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमें कुल 6.72 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस ठगी में आरोपी खुद को फर्जी पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डरा-धमकाकर ऑनलाइन ही घंटों डिटेन करते हैं। और फिर उन पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ऐंठते हैं।
साइबर पुलिस अधीक्षक दिनेश शर्मा ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट कानून में परिभाषित नहीं हैं। और यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो कॉल से सतर्क रहें, और यदि इस तरह की कोई घटना सामने आती हैं। तो तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क करें। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल की जा सकती हैं।
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हिमाचल में बढ़ रहा डिजिटल अरेस्ट का खतरा
विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों पर नजर डालें तो शिमला जोन में दिसंबर 2024 में दो मामलों में 93.05 लाख और जुलाई 2025 में एक मामले में 138.25 लाख रुपये की ठगी हुई, लेकिन रिकवरी शून्य रही। मंडी में 2024 और 2025 में पांच मामलों में कुल 158.94 लाख की ठगी हुई, जिसमें करीब 11.29 लाख रुपये की आंशिक रिकवरी हुई। वहीं धर्मशाला जोन में 2023 से 2025 के बीच छह मामलों में 282.4 लाख रुपये की ठगी हुई। और लगभग 21.76 लाख रुपये की रिकवरी संभव हो सकी।
साइबर ठगी से बचने के क्या करे
साइबर पुलिस ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए आमजन से अपील की हैं। कि वे किसी भी प्रकार की धमकी या गिरफ्तारी की सूचना को गंभीरता से लेने से पहले संबंधित थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 से पुष्टि करें। पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है ताकि लोग इस आधुनिक साइबर ठगी के जाल में न फंसें।