राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि महिलाओं को राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने इसे एक कड़वी सच्चाई बताते हुए कहा कि महिलाएं अपने संकल्प और संघर्ष के दम पर लगातार आगे बढ़ रही हैं। राजे शनिवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित ‘जाट महिला शक्ति संगम’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
“महिलाओं को राजनीति में पुरुषों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर उन्हें पहचान और स्थान मिलता है। यह सच्चाई है, लेकिन महिलाएं अपने संघर्ष और संकल्प से लगातार आगे बढ़ रही हैं।” — वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री
आंकड़ों में महिला शक्ति का सफर
वसुंधरा राजे ने आंकड़ों के जरिए देश में महिलाओं की स्थिति में आए बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आजादी के समय देश में महिला साक्षरता दर महज 9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा, “यह एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमें अभी लंबा सफर तय करना है।”
राजे ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व का जिक्र करते हुए कहा कि 1957 के आम चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 3 प्रतिशत थी, जो अब 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पहली लोकसभा में जहां 22 महिला सांसद थीं, वहीं आज यह संख्या 74 हो गई है। इसी तरह राज्यसभा में भी महिलाओं की संख्या 15 से बढ़कर 42 हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह संख्या अभी भी पर्याप्त नहीं है और महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर होनी चाहिए।
शिक्षा ही सफलता की असली कुंजी
पूर्व CM ने शिक्षा को महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए कहा कि इन दोनों ने साबित कर दिया है कि शिक्षा ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने कहा कि पढ़ी-लिखी महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं। इस दौरान उन्होंने डॉ. कमला बेनीवाल, हेमा मालिनी, सुमित्रा सिंह, दिव्या मदेरणा और कृष्णा पूनिया जैसी महिला नेताओं का भी जिक्र किया।
जाट आरक्षण में भूमिका को सराहा
कार्यक्रम में जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने जाट आरक्षण को बचाने में वसुंधरा राजे की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि धौलपुर और भरतपुर के जाटों को आरक्षण दिलाने का काम भी राजे के नेतृत्व में ही संभव हुआ था। कार्यक्रम में विधायक डॉ. शिखा मील, पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया और पूर्व न्यायाधीश डॉ. राजेंद्र चौधरी ने भी महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे।





