जुलाई में एक बार फिर रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले बैंकों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थित दो-दो बैंकों पर पेनल्टी लगाई गई है। वहीं छत्तीसगढ़ और गुजरात के एक पर कार्रवाई की गई है। इसकी जानकारी आरबीआई ने 23 जुलाई को अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है।
इन बैंकों की वित्त स्थिति को चेक करने के लिए नाबार्ड या आरबीआई द्वारा एक संवैधानिक निरीक्षण मार्च 2025 तक किया गया था। इस दौरान यह पता चला कि बैंक को दिशा निर्देशों का सही से अनुपालन नहीं कर रहे हैं। जिसके बाद एक नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। इस नोटिस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक प्रस्तुतियों को देखते हुए जब आरोप सही साबित हुए, तब पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
महाराष्ट्र के इन बैंकों पर गिरी गाज
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में स्थित सिंधुदुर्ग डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 13.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस बैंक ने निदेशकों से संबंधित लोन स्वीकृत किए हैं। काटोल में स्थित अरविंद सहकारी बैंक लिमिटेड पर आरबीआई ने 11 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। इस बैंक ने भूमि अधिग्रहण के लिए बिल्डर या ठेकेदार को लोन स्वीकृत किए। इसके अलावा कुछ अपात्र डिपॉजिटर्स को अतिरिक्त ब्याज भी ऑफर किया ।
कर्नाटक के इन बैंकों पर लगा जुर्माना
मांड्या डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिते पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगा है। बैंक बीआर एक्ट के नियमों का उल्लंघन करते हुए अन्य को-ऑपरेटिव सोसाइटीज में अपने शेयर रखे थे। हस्सन में स्थित द सिटी को-ऑपरेटिव बैंक पर पर भी 50,000 रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। यह बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड करने में असफल रहा।
इन बैंकों पर भी आरबीआई ने दिखाई सख्ती
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में स्थित राजनांदगांव केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित पर एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। इस बैंक ने अपात्र डिपॉजिटर्स को अतिरिक्त ब्याज ऑफर किया था। वहीं गुजरात के बारिया में स्थित श्री बारिया नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड पर भी एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। बैंक 1 अप्रैल 2023 से लेकर 31 मार्च 2025 तक इंटरनल ऑडिट करने में विफल रहा।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
आरबीआई ने ने स्पष्ट किया है कि बैंकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। वे पहले की तरह ही सभी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। सेंट्रल बैंक ने कहा कि, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है। न ही इसका असर भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर पड़ेगा।






