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ई-मैगजीन “सपनों की उड़ान” को लेकर CBSE ने जारी की गाइडलाइंस, स्कूलों से मांगी प्रविष्टियाँ, दिए ये निर्देश, देखें खबर

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सीबीएसई ने स्कूलों को हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है। जिसकी आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2024 है।
ई-मैगजीन “सपनों की उड़ान” को लेकर CBSE ने जारी की गाइडलाइंस, स्कूलों से मांगी प्रविष्टियाँ, दिए ये निर्देश, देखें खबर

CBSE News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने ई-मैगजीन “सपनों की उड़ान” को लेकर सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया है। छात्रों और शिक्षकों द्वारा लिखित प्रविष्टियों की मांग भी की है। इस संबंध में महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं।

बता दें कि पिछले महीने एनसीईआरटी और सीबीएसई ने साथ मिलकर ई-पत्रिका लॉन्च की गई थी। इस बार मैगजीन की थीम “विकसित भारत की यात्रा में शिक्षा: आपके सपने और आकांक्षाएं” हैं। सीबीएसई ने स्कूलों को हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है। जिसकी आखिरी तारीख 2 अक्टूबर 2024 है। बोर्ड ने स्कूलों को इस बात की जानकारी शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के बीच प्रसारित करने की सलाह दी है।

स्कूलों को बोर्ड ने दिए ये निर्देश

छात्र और शिक्षक अपने द्वारा रचित कविता, कहानी, फिक्शन इत्यादि जमा कर सकते हैं। इसके लिए कुछ नियमों का पालन भी करना होगा। फीचर्स यानी आलेख के लिए अधिकतम शब्द सीमा 1500 से लेकर 2000 होनी चाहिए। वहीं ट्रैवलॉग के लिए अधिकतम सीमा 1000 शब्द, कविता के लिए 150 से 200 शब्द, आलेख के लिए 1500 शब्द, कहानी या फिक्शन के लिए 1000 से लेकर 12000 शब्द निर्धारित किया गया है। शिक्षक और अभिभावक 1500 शब्दों में प्रैक्टिस, इन्नोवेटिव आईडियाज और गतिविधियों को साझा कर सकते हैं। 1500 से लेकर 2000 शब्दों में करंट टॉपिक थिम का योगदान भी दे सकते हैं।

इन बातों का ख्याल रखें 

स्कूल अपने कंटेंट को और भी बेहतर बनाने के लिए थीम से संबंधित ऑरिजिनल तस्वीरों या इलस्ट्रेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। संपूर्ण विषय मौलिक होना चाहिए। किसी भी अन्य सोर्स से कॉपी या अनुवादित कंटेन्ट मान्य नहीं होगा।

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Manisha Kumari Pandey
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पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey
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