वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हर एक ग्रह एक निश्चित समय अंतराल के बाद राशि बदलता है, जिससे योग-राजयोग का निर्माण होता है। इसी क्रम में अप्रैल महीने की शुरूआत में ग्रहों के राजकुमार बुध और देवताओं के गुरु बृहस्पति मिलकर नवपंचम राजयोग बनाने जा रहे हैं। वर्तमान में वाणी, व्यापार, संचार के बुद्धि के कारक कहे जाने वाले बुध कुंभ राशि (शनि की राशि) में विराजमान हैं। वहीं गुरु बुध की राशि मिथुन (दृक पंचांग के अनुसार) में संचरण कर रहे हैं। 3 अप्रैल 2026 (शाम 4:55 बजे) बुध और गुरु एक-दूसरे से 120 डिग्री के कोण पर होंगे, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष में इस राजयोग को लाभकारी और बेहद शुभ माना गया है। वैसे तो इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा लेकिन इसके बनने से 3 राशियों के लिए लकी साबित हो सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…
वृषभ राशि पर प्रभाव
ये भी पढ़ें
- आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
- नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती है। उच्च अधिकारियों से सहयोग मिलने के योग हैं।
- इस अवधि में व्यापार के क्षेत्र में बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं ।
- लंबे समय से अटके और फंसे हुए पैसे वापस मिल सकते हैं।
- लव लाइफ शानदार रहने वाली है। पार्टनर के साथ अच्छा वक्त बीतेगा।
- छात्रों का उच्च शिक्षा पाने का सपना पूरा हो सकता है।
कर्क राशि पर प्रभाव
- नौकरी में पदोन्नति मिलने के प्रबल योग हैं।
- आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना है।
- विदेश में यात्रा के मौके मिल सकते हैं।
- धार्मिक और अध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है।
- सेहत अच्छी रहने वाली है।
- प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को सफलता मिल सकती है।
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि के प्रबल योग हैं।
- व्यापार में मुनाफे के साथ नया सौदा मिल सकता है।
तुला राशि पर प्रभाव
- भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।
- नया घर या वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है।
- संतान पक्ष की ओर से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
- भाग्य का साथ मिल सकता है।
- लंबी दूरी की यात्राएं कर सकते हैं।
- वैवाहिक जीवन शानदार रहने वाला है।
- अविवाहित जातकों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं।
- विद्यार्थियों के लिए समय उत्तम रह सकता है।
ऐसे बनता है कुंडली में नवपंचम राजयोग
ज्योतिष के मुताबिक, नवपंचम राजयोग तब बनता है जब दो ग्रह आपस में पंचम (5वां) और नवम (9वां) भाव या राशि में स्थित होते है। पंचम भाव बुद्धि, शिक्षा, रचनात्मकता और संतान से जुड़ा होता है या जब दो ग्रह एक दूसरे से त्रिकोण भाव में स्थित हो जाते हैं या दोनों ग्रहों के बीच 120 डिग्री का कोण बनता है तथा एक ही तत्व राशि होती है। ज्योतिष के मुताबिक, मेष, सिंह व धनु को अग्नि राशि, वृषभ, कन्या तथा मकर को पृथ्वी राशि, मिथुन, तुला और कुंभ को वायु राशि और कर्क, वृश्चिक एवं मीन को जल राशि माना जाता है, ऐसे में जब एक ही तत्व वाली दो राशियों में 2 ग्रह पहुंचकर 120 डिग्री का कोण बनाते हैं, तो नवपंचम राजयोग बनता है।
(डिसक्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP Breaking News किसी भी ज्योतिषीय दावे या भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)