दतिया।सत्येन्द्र रावत।
कोविड-19 के संक्रमण के महामारी के दौर में पूरे देश में लगाए गए लॉक डाउन को लेकर पुलिस भले ही शहर क्षेत्र में सख्ती का माहौल बनाए हुए हैं जिससे लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं वहीं गोराघाट क्षेत्र में असामाजिक तत्वों द्वारा जुआ का फड़ संचालित हो रहा था जिसकी पिन पॉइंट सूचना गोराघाट पुलिस थाना प्रभारी अजय चन्ना को लगी तो उन्होंने एक पुलिस दल तैयार कर जुआरियों को पकड़ने के लिए रवाना किया जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जुआ खेल रहे जुआरियों को पकडने पहुंची लेकिन किसी प्रकार से जुआरियों को भनक लगी तो जुआरी पुलिस टीम को चकमा देकर भागने में सफल हो गए वहीं पुलिस ने एक युवक को मौके से ताश की गड्डी एवं कुछ नगदी सहित गिरफ्तार किया है पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम देवेंद्र सिंह रावत निवासी गौरा बताया है वही आरोपी से पूछताछ में उसने अपने अन्य 3 साथियो के नाम पुलिस के सामने मैं सबूत के दर्ज कराए हैं जिस पर पुलिस थाना प्रभारी की विवेचना के बाद *आशु पुत्र स्व माधौ सिंह रावत 22 वर्ष निवासी कोटरा तहसील व जिला दतिया प्रमोद जाटव निवासी गोरा एवं लूंगी रावत निवासी गोरा के खिलाफ 13 जुआ एक्ट एवं धारा 188, 269 270 तथा आपदा प्रबंधन की धारा 151 के तहत मामला मपंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया है..।वहीं पुलिस थाना प्रभारी अजय चनना ने बताया गया है कि इस महामारी के दौर में कहीं भी कोई भी अपराध घटित होता है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और कहीं भी कोई भी अवैध उत्खनन या असामाजिक तत्व घूमते दिखाई दे तो तुरंत थाना प्रभारी को सूचित करें।
जुए के फड़ पर पुलिस का छापा, 4 जुआरियों पर मामला दर्ज
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






