अतुल सक्सेना/ग्वालियर। चंबल संभाग (gwalior chambal division) में व्यापक पैमाने पर हो रहे अवैध उत्खनन (Illegal mining) को लेकर हाईकोर्ट (high court) ने राज्य शासन (state government) को कड़ी फटकार लगाई है । दरअसल मध्यप्रदेश में मुरैना (morena) एक ऐसा जिला है जहां पर चंबल नदी ( chambal river) बहती है और जहां पर अभ्यारण चंबल नदी पर ही बना हुआ है जहां से रेत का उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके मुरैना में हजारों ट्रॉली चंबल नदी से रोज निकाली जाती हैं और अवैध उत्खनन बदस्तूर जारी है। रेत के अवैध उत्खनन के चलते मुरैना में एक आईपीएस (ips) अधिकारी की हत्या तक हो चुकी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि ग्वालियर चंबल संभाग में अवैध खनन को रोकने के लिए न केवल सख्त कदम उठाए जाएं बल्कि एसटीएफ (stf) या सीआईएसएफ (cisf) लगाकर इसकी व्यवस्था की जाए। हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि पारंपरिक सुरक्षा की बजाय इंटरनेट(internet) और कंप्यूटर (computer) सुरक्षा अपनाई जाए ताकि किसी भी तरह से अवैध खनन ना हो सके। नदियों के रास्ते और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी (cctv) और सेटेलाइट (setelite) से निगरानी कराई जाए ।साथ ही सीसीटीवी और सेटेलाइट को अधिकारियों से मोबाइल (mobile) से जोड़ने वाला सॉफ्टवेयर (software) भी बनाया जाए। इसी के साथ ही कानून को सख्त और गैर जमानती बनाकर सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने के निर्देश भी राज्य शासन को दिए गए हैं। राज्य शासन को इस आदेश का पालन तुरंत करने और हर दो माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में देने के निर्देश भी दिए गए हैं। दरअसल इस संबंध में अधिवक्ता अवधेश भदोरिया ने जनहित याचिका लगाई थी जिस पर हाईकोर्ट ने यह संज्ञान लेते हुए निर्णय दिया है।
हाई कोर्ट का आदेश, ग्वालियर चंबल में अवैध उत्खनन रूप में एसटीएफ या सीआईएसफ लगाई जाए
Written by:Gaurav Sharma
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इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






