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प्लॉट के नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार के रीडर ने मांगी रिश्वत, EOW ने रंगे हाथ पकड़ा

Written by:Atul Saxena
Published:
शिकायतकर्ता जितेंद्र पांडे ने बताया कि आरोपी रीडर अनिल कुटवारिया ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी पैसे देने की बात कही और 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
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प्लॉट के नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार के रीडर ने मांगी रिश्वत, EOW ने रंगे हाथ पकड़ा

EOW raid at Gwalior Collectorate

रिश्वतखोरी पर लगातार एक्शन के बाद भी घूसखोर अपनी आदतें नहीं बदल रहे, EOW ग्वालियर की टीम ने ऐसे ही एक भ्रष्ट शासकीय सेवक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। आरोपी नायब तहसीलदार का रीडर है, वो आवेदक को भूखंड के नामान्तरण के लिए  पिछले एक साल से टरका रहा था परेशान व्यक्ति ने शिकायत की और रिश्वतखोर पकड़ा गया।

ग्वालियर कलेक्ट्रेट में आज गुरुवार उस समय सनसनी फैल गई जब वहां EOW की टीम दिखाई दी, लोग कुछ समझ पाते तक टीम का एक्शन शुरू हो चुका था। ईओडब्ल्यू की टीम नायब तहसीलदार वृत्त गोशपुरा डॉ रमाशंकर सिंह के कक्ष में घुसी और वहां उसने आवेदक जितेंद्र पांडे से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रीडर अनिल कुटवारिया  को रंगे हाथ दबोच लिया।

प्लॉट के नामांतरण के लिए एक साल से कटवा रहा था चक्कर 

जितेंद्र पांडे ने मीडिया को बताया कि उसने अपना एक प्लॉट अपनी बुआ को बेचा था 16 जुलाई 2025 को उसने रजिस्ट्री की थी और यहाँ नामांतरण के लिए फ़ाइल आई थी रीडर अनिल कुटवारिया मुझे तभी से लगातार परेशान कर रहा था। ये दो बार फ़ाइल को निरस्त कर चुका था  जब कारण पूछा तो रीडर ने 50 हजार रुपये रिश्वत की की डिमांड की लेकिन 40 लेने पर राजी हो गया, मैंने इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू में की और टीम ने 20 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।

रिश्वत हाथ में आते ही EOW ने दबोचा रीडर 

ईओडब्ल्यू डीएसपी शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि आवेदक जितेंद्र पांडे ने 10 जून को ईओडब्ल्यू एसपी ऑफिस में आवेदन दिया था जिसमें भूखंड का नामांतरण करने के बदले नायब तहसीलदार के रीडर द्वारा रिश्वत मांगे जाने के आरोप थी , आवेदन की जाँच निरीक्षक मदन मोहन मालवीय ने की रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण मिलने पर आज कलेक्ट्रेट में छापा मरकर रीडर अनिल कुटवारिया को 20,000/- रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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