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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, BSF जवानों की जबरन सेवानिवृत्ति रद्द, जानें पूरा मामला

Written by:Vijay Choudhary
Published:
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, BSF जवानों की जबरन सेवानिवृत्ति रद्द, जानें पूरा मामला

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बीएसएफ के दो जवानों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल समय की पाबंदी में हुई छोटी चूक के आधार पर इतनी सख्त कार्रवाई करना ठीक नहीं है, खासकर जब जवानों का सेवा रिकॉर्ड अच्छा हो। कोर्ट ने प्रशासनिक नियमों का पालन न करने और समग्र मूल्यांकन न करने पर सवाल उठाए। इस फैसले से यह संदेश गया कि सेवा में अनुशासन जरूरी है, लेकिन मामूली गलती के लिए किसी की पूरी सेवा समाप्त कर देना न्यायसंगत नहीं है।

बीएसएफ जवानों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति रद्द

हाई कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल के दो जवानों – श्रीकांत गौड़ा पाटिल और चौधरी दशरथ भाई – को समय की पाबंदी में हुई चूक के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल मामूली गलती के आधार पर कठोर दंड देना उचित नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि जवानों का सेवा रिकॉर्ड बेहतर रहा है, इसलिए उनकी सेवा समाप्त करना असमानुपातिक कदम है।

सेवा रिकॉर्ड बेदाग होने का हवाला

याचिकाकर्ता पाटिल और चौधरी ने कोर्ट में कहा कि उनका सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है। पाटिल को पिछले पाँच वर्षों में चार बार “बहुत अच्छा” और एक बार “अच्छा” दर्जा मिला। वहीं, चौधरी को दो बार “बहुत अच्छा” और तीन बार “अच्छा” ग्रेड दिया गया। कोर्ट ने पाया कि उन पर लगाए गए आरोप जैसे छुट्टी पर देरी से लौटना मामूली थे और सेवा समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

प्रशासनिक गाइडलाइन का पालन नहीं

जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की बेंच ने कहा कि बीएसएफ अधिकारियों ने अपनी प्रशासनिक गाइडलाइन का पालन नहीं किया। गाइडलाइन में कहा गया है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति से पहले जवानों के सेवा रिकॉर्ड का कम से कम तीन से चार साल का मूल्यांकन करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे जवानों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

तीन प्रतिकूल प्रविष्टियों पर सवाल

कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन या उससे अधिक प्रतिकूल प्रविष्टि होना सेवानिवृत्ति का आधार नहीं है। यह केवल मूल्यांकन शुरू करने का एक कारण हो सकता है, न कि सेवा समाप्त करने का। कोर्ट ने प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर दिया।

कोर्ट का फैसला और संदेश

हाई कोर्ट ने दोनों जवानों की सेवा समाप्ति के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि सेवा में अनुशासन जरूरी है, लेकिन छोटी-मोटी गलती के लिए किसी की पूरी सेवा खत्म कर देना उचित नहीं। यह फैसला जवानों के अधिकारों की रक्षा का उदाहरण बन गया है और प्रशासन को सेवा नियमों का पालन करने की सीख देता है। इससे सैनिकों में भरोसा बढ़ेगा।

Vijay Choudhary
लेखक के बारे में
पछले पांच सालों से डिजिटल पत्रकार हैं. जुनूनी न्यूज राइटर हैं. तीखे विश्लेषण के साथ तेज ब्रेकिंग करने में माहिर हैं. देश की राजनीति और खेल की खबरों पर पैनी नजर रहती है. View all posts by Vijay Choudhary
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