नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संगठन के ढांचे में एक बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य संगठन को और अधिक विकेंद्रीकृत करना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को तेज और प्रभावी बनाना है। हरियाणा के समालखा में संपन्न हुई तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस प्रस्तावित बदलाव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।
बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने मीडिया को बताया कि संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता और संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में देशभर के 46 प्रांतों से 1487 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संघ के अनुसार, वर्तमान में देशभर में 88 हजार से ज्यादा शाखाएं सक्रिय हैं और संगठन का विस्तार अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश और लेह जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक हो चुका है।
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क्या हैं प्रस्तावित संगठनात्मक बदलाव?
संघ के मौजूदा ढांचे में बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटा गया है, जहां प्रांत प्रचारक संगठन का काम देखते हैं। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत इस संरचना को बदला जाएगा।
राज्य प्रचारक का नया पद: अब तक सक्रिय लगभग 45 प्रांत प्रचारकों की व्यवस्था की जगह हर राज्य के लिए एक ‘राज्य प्रचारक’ नियुक्त करने की योजना है। यह राज्य प्रचारक पूरे प्रदेश में संगठन की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता आएगी।
संभाग बनेगी नई इकाई: संगठन की ताकत को नीचे से ऊपर की ओर मजबूत करने के लिए ‘संभाग’ को एक नई और महत्वपूर्ण इकाई के रूप में स्थापित किया जाएगा। प्रशासनिक तौर पर दो मंडलों को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा, जहां एक ‘संभाग प्रचारक’ की नियुक्ति होगी। अनुमान है कि देशभर में ऐसे करीब 80 संभाग बनाए जा सकते हैं। इस कदम से जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं का सीधा संवाद संभाग प्रचारक से हो सकेगा।
क्यों किया जा रहा है यह बदलाव?
संघ सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य निर्णय प्रक्रिया को तेज करना और जमीनी स्तर पर संगठन की पकड़ को और मजबूत करना है। नई व्यवस्था से शीर्ष नेतृत्व पर काम का बोझ कम होगा और स्थानीय इकाइयों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी। इससे संगठन के विचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में आसानी होगी।
“हम एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं जिसमें संगठन की शक्ति ऊपर से नीचे के बजाय नीचे से ऊपर की ओर अधिक मजबूत हो।”- संघ सूत्र
इस प्रस्ताव को सितंबर 2026 में होने वाली बैठक में अंतिम रूप दिया जा सकता है और जनवरी-फरवरी 2027 तक इसे पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी हुई चर्चा
प्रतिनिधि सभा में मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष पर शांति की आवश्यकता पर जोर दिया गया और कहा गया कि विश्व शांति संघ का मूल ध्येय है। इसके अलावा, गुरु तेग बहादुर से जुड़े विषयों पर देश के 31 प्रांतों में आयोजित 2134 कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई, जिनमें सिख समुदाय की बड़ी भागीदारी रही। वहीं, यूजीसी से जुड़े एक विवाद पर होसबाले ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और संघ अदालत के फैसले का इंतजार करेगा।