सुनील विश्वकर्मा/जबलपुर। मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर कर टैरिफ दरों में वृद्धि की मांग की है। बिजली कंपनियों ने वर्ष 2020-21 में 2000 करोड़ के आकंलित घाटे का हवाला देते हुए 41 हजार करोड़ पर खर्च के मुकाबले आय 39 हजार करोड़ बताई है और उसकी पूर्ति के लिए बिजली के दाम औसतन 5.4% बढ़ाने की मांग की है। वहीं घरेलू बिजली के दाम 5.28%, कृषि के लिए बिजली के दाम 6.61% और उद्योगों के लिए बिजली के दाम 4.81% बनाने की मांग की गई है। बिजली कंपनियों द्वारा बताई गई टैरिफ याचिका पर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दावे आपत्तियां मंगाई हैं और जनता को आपत्तियां पेश करने के लिए 7 मार्च तक का समय दिया है। जनता की आपत्ति पेश करने के बाद भोपाल, इंदौर जबलपुर में विद्युत नियामक आयोग सुनवाई करेगा और इस सुनवाई के बाद बिजली के दाम बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा
प्रदेश की जनता को फिर लगेगा करंट, बिल बनाने की तैयारी
Written by:Gaurav Sharma
Last Updated:
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






