मध्य प्रदेश में अवैध खाद्य विक्रय (MP Fertilizers Black Marketing) को रोकने के लिए ” सूचना दाता प्रोत्साहन योजना” लागू है। इसका उद्देश्य प्रदेश में नगदी खाद और अवैध भंडारण पर काबू पाना है। इसकी शुरुआत कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के साथ ही कर दी है, जो 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। स्कीम के तहत यदि कोई भी व्यक्ति खाद कालाबाजारी की सूचना देता है तो उसे 1000 रुपये का ईनाम दिया जाएगा। हालांकि प्रोत्साहन पुरस्कार जांच में शिकायत सही पाने पर दी जाएगी।
सूचना दाता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बिना लाइसेंस के अवैध विक्रय या निर्माण, पूर्व निर्धारण समय से अधिक मात्रा में खाद भंडारण और तय कीमतों से अधिक ऊंचे दामों पर खाद का विक्रय संबंधित शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा नकली या मिलावटी उर्वरकों का निर्माण और उनकी बिक्री, सरकारी अनुदान वाले उर्वरकों का फैक्ट्री या औद्योगिक संस्थानों में अवैध उपयोग और अनाधिकृत रूप से खाद का एक स्थान से दूसरे स्थान तक अवैध परिवहन जैसी गतिविधियों की सूचना देने पर प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा।
गोपनीय रखी जाएगी पहचान
कृषि विभाग में स्पष्ट किया है की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरीके से गोपनीय रखी जाएगी। बिना अनुमति पहचान का उजागर नहीं किया जाएगा। सूचना में अवैध गतिविधि का स्थान, समय और संबंधित व्यक्ति या संस्थान का नाम जैसी जानकारी देनी होगी। यदि संभव हो तो फोटो, वीडियो या दस्तावेज भी अटैच कर सकते हैं।
कैसे करें शिकायत?
नागरिक सीएम किसान हेल्पलाइन नंबर “155253” का इस्तेमाल करके सूचना दे सकते हैं। हेल्पलाइन पर मिली जानकारी को सीधे संबंधित जिला कलेक्टर के पास ट्रांसफर किया जाएगा। जिसकी जांच तत्काल रूप से विशेषज्ञों की टीम द्वारा की जाएगी। सूचना सही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। फिर बैंक खाते में ईनाम की राशि ट्रांसफर की जाएगी।
खाद कालाबाजारी को लेकर दिग्विजय सिंह ने लिखा सीएम को पत्र
कांग्रेस ने भी मध्य प्रदेश में उर्वरकों के अवैध विक्रय को लेकर सरकार के सामने कई मांगे रखी है। इस संबंध वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में प्रदेश भर में उर्वरक विक्रय व्यवस्था की विशेष एवं स्वतंत्र जांच और कार्रवाई करने की मांग की गई है। इसके अलावा उर्वरक बैग पर जो मुद्रित मूल्य अंकित है, उससे अधिक मूल्य पर विक्रय न हो यह सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। किसानों से वसूल की गई अतिरिक्त राशि वापस करने की मांग भी शामिल है।







