शिमला: हिमाचल प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के साथ सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के तीन साल बीतने पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने पहले बजट की घोषणाओं को भी अब तक जमीन पर नहीं उतार पाई है और कई योजनाएं सिर्फ कागजों में धूल फांक रही हैं। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू से चौथा बजट पेश करने से पहले पिछली घोषणाओं का हिसाब देने की मांग की है।
एक बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस झूठी गारंटियां देकर सत्ता में आई, उसी तरह विधानसभा के भीतर बजट में भी झूठी घोषणाएं करके सरकार चला रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी रैली और विधानसभा में कही गई बातों में फर्क होता है और बजट में किए गए प्रावधानों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
कागजों में अटकी योजनाएं
नेता प्रतिपक्ष ने कई अधूरी योजनाओं का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि पहले ही बजट में 20,000 मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए 25 हजार रुपये की सब्सिडी देने का वादा किया गया था, जिसका अब कोई जिक्र तक नहीं होता। इसी तरह, प्रदेश में छह ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा के विपरीत सरकार ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग पर 6 रुपये प्रति यूनिट का पर्यावरण सैस लगा दिया।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “प्रदेश के हर विधानसभा में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोलने की घोषणा हुई लेकिन काम सिर्फ हवा-हवाई हैं। चंबा, नाहन, हमीरपुर में पैट स्कैन की घोषणा फाइलों में दफन है।”
“कांग्रेस ने गारंटी के नाम पर प्रदेश की मातृ शक्ति से झूठ बोला और बजट की घोषणा के नाम पर छात्र शक्ति से झूठ बोला। किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं, जनजातीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए की गई छोटी-छोटी घोषणाएं भी कागज से बाहर नहीं निकल पाई हैं।”- जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
बजट और कर्ज पर उठाए सवाल
जयराम ठाकुर ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार ने तीन वर्षों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इसके अलावा, इस अवधि में सरकार ने 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया।
उन्होंने पूछा, “इतना बड़ा बजट पेश करने और भारी ऋण लेने के बावजूद यदि विधानसभा में बजट के दौरान घोषित योजनाओं को तीन-तीन वर्षों तक शुरू भी नहीं किया जा सका, तो यह सरकार की नीति, नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”
ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जब बजट में योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया था, तो उन योजनाओं की शुरुआत क्यों नहीं हुई? और उन योजनाओं के लिए आवंटित किया गया पैसा आखिर गया कहां?






