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धनतेरस पर इसलिए जलाया जाता है यम का दीपक, जुड़ी है पौराणिक मान्यता

Written by:Diksha Bhanupriy
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धनतेरस पर इसलिए जलाया जाता है यम का दीपक, जुड़ी है पौराणिक मान्यता

धर्म, डेस्क रिपोर्ट। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस (Dhanteras) का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पूजा पाठ और खरीददारी को लेकर कुछ विशेष मान्यताएं हैं। प्राचीन काल से ही इस दिन। यम के नाम का दीपक घरों में जलाने की परंपरा चली आ रही है। मृत्यु के देवता यम के लिए दीपक जलाने के पीछे एक खास कथा हैं। इसी के साथ दीपक जलाने के कुछ नियम भी है।

दिशा

यम के नाम का दीपक जलाते समय दिशा का ध्यान रखना आवश्यक है। इस दिन आटे से चौमुख आकार का दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है।

मंत्र

यम का दीपक प्रज्वलित करते समय एक खास मंत्र का जाप भी किया जाता है।

मृत्युनां दण्डपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह. त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम्

इस मंत्र का जाप करने से यम देवता प्रसन्न होते हैं।

ये है पौराणिक कथा

कथा के मुताबिक एक बार भगवान ने अपने दूतों से सवाल किया कि जब तुम प्राणियों के प्राण हारते हो उस समय तुम्हें किसी पर दया आती है। यह सुनकर यमदूतों ने हिचकते हुए नहीं में जवाब दिया। इसके बाद यमराज ने उन्हें कहा कि बिना डरे वह इस बात का सच सच जवाब दें। दूतों ने बताया कि एक बार उनका दिल एक व्यक्ति के प्राण लेते समय पसीज गया था। दूतों ने कहा कि हंस नामक राजा जब एक बार शिकार करते हुए दूसरे राज्य की सीमा में चले गए तो वहां के शासक हेमा ने उनका बहुत सत्कार किया। राजा हेमा की पत्नी को एक पुत्र हुआ। ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना के आधार पर बताया कि विवाह के 4 दिन बाद यह बालक जिंदा नहीं रहेगा। राजा हंस ने बालक को यमुना के किनारे एक गुफा में रखकर ब्रह्मचर्य का पालन करने के आदेश दिए।

कहा जाता है कि विधि का विधान निश्चित होता है। एक दिन राजा हंस की बेटी यमुना तट पर पहुंची और ब्रह्मचारी बालक के साथ गंधर्व विवाह रचा लिया। विवाह होने के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो गई। जब यमदूत राजकुमार के प्राण लेने के लिए पहुंचे तो राजकुमारी के विलाप को देखकर भावविभोर हो गए।

यमदूतों की इस बात को सुनने के बाद यमराज ने अकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा कि धनतेरस के दिन विधि विधान से दीपदान और पूजन करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलेगा। जिस घर में यह पूजन किया जाएगा वहां अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। इसी के बाद से अनंत काल से धनतेरस के दिन दीपदान किया जाता है।

(Disclaimer: यहां बताई गई जानकारी सामान्य मान्यताओं के आधार पर दी गई है। MP Breaking News इसकी पुष्टि नहीं करता।)

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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