मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में आज यानी सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हो रही है। जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस गजेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। आज की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपी गई सर्वे रिपोर्ट पर विभिन्न पक्षों ने क्या दावे और आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
पिछली सुनवाई 23 फरवरी को हुई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को ASI की विस्तृत रिपोर्ट पर अपने सुझाव और आपत्तियां दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। आज की सुनवाई में इन्हीं जवाबों और आपत्तियों के आधार पर मामले की भविष्य की दिशा तय की जाएगी।
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क्या मिला था ASI की सर्वे रिपोर्ट में?
ASI ने हाईकोर्ट के निर्देश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिनों तक भोजशाला परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक सर्वेक्षण, जांच और सीमित खुदाई का काम किया था। इस टीम में पुरातत्वविदों, अभिलेखविदों और रसायनविदों समेत कई विशेषज्ञ शामिल थे।
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए थे:
- बहुभाषी शिलालेख: परिसर से 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेख मिले हैं, जिनमें संस्कृत-प्राकृत (नागरी लिपि में) और अरबी-फारसी दोनों भाषाओं के लेख शामिल हैं।
- अरबी-फारसी लेख: कुल 56 अरबी-फारसी शिलालेख पाए गए, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य खुदे हुए हैं।
- संस्कृत शिलालेख: 12वीं-16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख भी मिले, जिनमें ‘पारिजातमंजरी-नाटिका’ और ‘अवनिकर्मसातम’ जैसे साहित्यिक ग्रंथों का उल्लेख है।
- पुनर्उपयोग के साक्ष्य: कुछ पत्थरों पर पुरानी लिखावट को मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत भी मिले हैं, जो संरचना में बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला था कि यह स्थल अलग-अलग समय में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया और अदालती दांव-पेंच
यह मामला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरा है। पहले इसे हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से जबलपुर स्थित प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि, 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई के बाद इसे वापस इंदौर बेंच को ही सौंप दिया।
“कोर्ट के निर्देशानुसार हम दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करेंगे।” — विनय जोशी, अधिवक्ता, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (पिछली सुनवाई के बाद)
इससे पहले 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। इसके बाद सर्वे के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर लगी रोक हट गई थी और रिपोर्ट पर सुनवाई का रास्ता साफ हुआ था। आज की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह मामला अब किस दिशा में आगे बढ़ेगा।