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मध्य प्रदेश के हजारों रोजगार सहायकों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, ट्रांसफर पॉलिसी और मार्गदर्शिका 2025 पर लगी रोक

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Banshika Sharma
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के हजारों ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार की नई ट्रांसफर पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगा दी है। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 के क्रियान्वयन को निलंबित कर दिया और अगले आदेश तक किसी भी सहायक के स्थानांतरण पर रोक लगा दी है।
मध्य प्रदेश के हजारों रोजगार सहायकों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, ट्रांसफर पॉलिसी और मार्गदर्शिका 2025 पर लगी रोक

भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत हजारों ग्राम रोजगार सहायकों के लिए सोमवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी ‘ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025’ के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। इस फैसले के साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया है कि आगामी निर्देश तक किसी भी रोजगार सहायक का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय रोजगार सहायकों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उन्होंने सरकार की नई ट्रांसफर पॉलिसी और सेवा समाप्ति की शर्तों को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तारीख नियत की गई है।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक नई मार्गदर्शिका जारी की थी, जिसमें ग्राम रोजगार सहायकों के लिए एक स्थानांतरण नीति बनाई गई थी। इस नीति के तहत उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर किया जा सकता था। इसी नीति और सेवा से जुड़ी अन्य शर्तों को रोजगार सहायकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी नियुक्ति उनके पैतृक गांव में ही हुई थी और नई नीति उनकी सेवा शर्तों के विपरीत है।

सोमवार को इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के तर्क में दम है, जिसके बाद अदालत ने पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया पर ही अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।

कब और क्यों हुई थी इनकी भर्ती?

प्रदेश में जब रोजगार गारंटी स्कीम की शुरुआत हुई थी, तब मजदूरों के कामकाज और हिसाब-किताब को डिजिटल रूप में दर्ज करने के लिए शिवराज सरकार ने लगभग 28 हजार रोजगार सहायकों की भर्ती की थी। इन सहायकों की नियुक्ति उनकी 12वीं कक्षा के अंकों और कंप्यूटर डिप्लोमा (जैसे PGDCA) की योग्यता के आधार पर की गई थी।

उन्हें उन्हीं के पैतृक गांवों में नियुक्ति दी गई थी, ताकि वे स्थानीय स्तर पर मनरेगा के कार्यों का प्रबंधन कर सकें। चूंकि अधिकांश ग्राम सचिव कंप्यूटर संचालन में निपुण नहीं थे, इसलिए ये रोजगार सहायक ही उनका पूरा काम देखते आ रहे हैं। शुरुआत में उनका वेतन 9,000 रुपये प्रति माह था, जिसे बाद में सरकार ने अन्य मदों से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था।

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Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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