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न्यायालयों के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि, आदेश जारी

Written by:Atul Saxena
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हाई कोर्ट ने उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश मुख्यपीठ जबलपुर एवं खंडपीठ इंदौर/ग्वालियर में पदस्थ लॉ क्लर्क-कम रिसर्च असिस्टेंट के लिए दो सप्ताह का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत करने के निर्देश जारी किये हैं है।
न्यायालयों के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि, आदेश जारी

मध्य प्रदेश में कार्यरत न्यायालयीन कर्मचारियों के अच्छी खबर है, जबलपुर उच्च न्यायालय ने सभी न्यायालयों में पदस्थ तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि की है, उच्च न्यायालय ने इसके लिए अलग अलग आदेश जारी किये हैं

मध्य प्रदेश के न्यायालयों में काम करने वाले कर्मचारियों  के लिए अभी तक एक सप्ताह के ग्रीष्मकालीन अवकाश की सुविधा प्रदान की गई थी यानि न्यायालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि में कर्मचारी एक सप्ताह का अवकाश ले सकता था लेकिन अब इसमें बदलाव करते हुए वृद्धि की गई है।

तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एक की जगह अब दो सप्ताह का अवकाश  

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि  05 जुलाई 2018 की कंडिका-4 में दिए आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए, जिला स्थापना एवं कुटुम्ब न्यायालय की स्थापना पर कार्यरत ऐसे कर्मचारी जिनका वेतनमान छठवे वेतन आयोग के अनुसार ग्रेड-पे रुपये 3600/- एवं उससे अधिक है, ऐसे कर्मचारियों को एक सप्ताह के स्थान पर अब दो सप्ताह का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता हैं एवं रुपये 3600/- ग्रेड पे से कम वेतनमान प्राप्त करने वाले समस्त कर्मचारियों को (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर) एक सप्ताह के स्थान पर 10 दिवस का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश में भी वृद्धि 

इसी तरह उच्च न्यायालय ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश में भी वृद्धि की है, कोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि समस्त नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीगण, उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश जबलपुर द्वारा 17 मई 2025 को दिए गए आवेदन को स्वीकार करते हुए मुख्यपीठ जबलपुर ने 09 मई 2025 को दिए आदेश मेंआंशिक संशोधन करते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को स्वीकृत 1 सप्ताह के ग्रीष्मकालीन अवकाश को बढ़ाकर 10 दिवस का ग्रीष्मकालीन अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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