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सिविल जज भर्ती परीक्षा पर लगी रोक के अंतरिम आदेश को एमपी हाई कोर्ट ने वापस लिया

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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आदेश में कहा गया कि मुख्य परीक्षा के लिए एससी वर्ग के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत और एसटी वर्ग के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए जाएं। अदालत ने साक्षात्कार के न्यूनतम 20 अंकों में भी राहत देने के निर्देश दिए हैं ।
सिविल जज भर्ती परीक्षा पर लगी रोक के अंतरिम आदेश को एमपी हाई कोर्ट ने वापस लिया

mp highcourt

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज भर्ती परीक्षा पर लगी रोक के अंतरिम आदेश को वापस ले लिया है, इसी के साथ 4 वर्षों से अटकी सिविल जज भर्ती प्रक्रिया को अब कोर्ट के आदेश के बाद गति मिलेगी। बता दें हाई कोर्ट में सिविल जज भर्ती को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा था। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को भी मिले अंक सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले पर बुधवार को सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश वापस ले लिया,  डिवीजन बेंच ने सिविल जज भर्ती 2022 की प्रक्रिया को जारी रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट को बताया गया है कि उम्मीदवारों के अंक भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि एससी एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निशुल्क कोचिंग भी शुरू कर दी है।

हाईकोर्ट ने जनवरी में लगाई थी रोक 

उल्लेखनीय है कि सिविल जज भर्ती 2022 की नियुक्तियों में शत-प्रतिशत आरक्षण लागू करने और अनारक्षित वर्ग में योग्यता के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शामिल नहीं करने के मुद्दे सहित कथित अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। 23 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने एससी-एसटी अभ्यर्थियों के चयन पर गंभीर चिंता जताते हुए पुनर्विचार के निर्देश दिए थे और सिविल जज भर्ती परीक्षा 2022 के चलते जारी विज्ञापन और शुद्धिपत्र पर स्टे लगा दिया था।

चयन को लेकर भी कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि 191 पदों के लिए हुई परीक्षा में केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन हुआ और 121 पद खाली रह गए। सबसे गंभीर बात यह रही कि एसटी वर्ग से एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हुआ, जबकि एससी वर्ग से सिर्फ एक उम्मीदवार चयनित हुआ। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताया था।

न्यूनतम अंकों में राहत के निर्देश

सुनवाई में कोर्ट ने परीक्षा सेल को निर्देश दिए हैं कि न्यूनतम अर्हता अंकों में स्थिरता रखते हुए नई सूची तैयार की जाए। मुख्य परीक्षा के लिए एससी वर्ग के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत और एसटी वर्ग के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए जाएं। अदालत ने साक्षात्कार के न्यूनतम 20 अंकों में भी राहत देने के निर्देश दिए हैं ।

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