राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर गर्माई बहस अब अदालती चौखट तक पहुंच गई है, जहां कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड को बेंगलुरु की एक अदालत ने समन जारी किया है। यह समन आरएसएस के खिलाफ उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में जारी किया गया है, जिस पर अदालत ने 27 जून को सुनवाई करते हुए उन्हें 21 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर सुनवाई के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पाटिल ने इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए यह माना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का अपराध प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड के खिलाफ बनता है। इस न्यायिक प्रक्रिया ने कांग्रेस के इन दोनों युवा नेताओं को कानूनी दायरे में ला खड़ा किया है, जिससे राज्य की राजनीति में भी गहमागहमी बढ़ गई है। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपी नंबर 1 प्रियांक खरगे और आरोपी नंबर 3 मोहम्मद नलपाड के खिलाफ बीएनएस, 2023 की धारा 356 के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान लिया गया है, और कार्यालय को इस मामले को आपराधिक मामले के तौर पर दर्ज करने का निर्देश दिया जाता है। साथ ही, अदालत ने आरोपी नंबर 1 और 3 को समन जारी करने का आदेश भी दिया, जिसका जवाब उन्हें आगामी 21 जुलाई, 2026 तक न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा। हालांकि, इसी शिकायत में कर्नाटक के पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही करने से अदालत ने इनकार कर दिया है, जिससे उन्हें इस कानूनी शिकंजे से राहत मिली है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अक्टूबर 2025 में दिए गए बयानों से जुड़ा है, जिस पर बेंगलुरु निवासी और आरएसएस कार्यकर्ता ए. तेजस ने यह याचिका दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सदस्यों को निशाना बनाते हुए कई अपमानजनक बयान दिए थे, जिससे संगठन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। शिकायत के अनुसार, मंत्री रहते हुए प्रियांक खरगे ने 4 अक्टूबर, 2025 को कर्नाटक सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि आरएसएस को सरकारी खेल के मैदानों, स्कूलों और कॉलेजों का इस्तेमाल करने से रोका जाए। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि यह पत्र जानबूझकर मीडिया को जारी किया गया था और संगठन की बदनामी करने के स्पष्ट मकसद से खरगे के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इसे व्यापक रूप से साझा किया गया था, जिसने विवाद को और गहरा दिया।
21 जुलाई तक कोर्ट ने मांगा प्रियांक खरगे और नलपाड का जवाब
शिकायत में पिछले साल 13 और 14 अक्टूबर को प्रियांक खरगे द्वारा किए गए कथित सोशल मीडिया पोस्ट का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है। इन पोस्ट में से एक में कहा गया था, “आरएसएस सदस्य से कभी दोस्ती न करें। सिर्फ दोस्त ही नहीं, भले ही वह आपका परिवार का सदस्य हो। वे असल में दुर्व्यवहार करने वाले लोग होते हैं।” इस तरह की टिप्पणियों को आरएसएस कार्यकर्ता ने मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी, जिसके परिणामस्वरूप अब यह समन जारी हुआ है। अदालत ने मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड से 21 जुलाई तक जवाब मांगा है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि, जब गृह मंत्री प्रियांक खरगे से इस अदालती कार्यवाही के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।






