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सावधान! कहीं आप नकली गुड़ तो नहीं खा रहे? असली-नकली पहचानने की आसान ट्रिक जानें

Written by:Bhawna Choubey
Last Updated:
सर्दियों में गुड़ खाने का मज़ा ही कुछ और है, लेकिन बढ़ती मांग के बीच नकली गुड़ सेहत बिगाड़ सकता है। जानिए ऐसे आसान तरीके, जिनसे आप असली और नकली गुड़ को पहचान सकेंगे बिना किसी एक्सपर्ट के।
सावधान! कहीं आप नकली गुड़ तो नहीं खा रहे? असली-नकली पहचानने की आसान ट्रिक जानें

सर्दी की ठंडी सुबहों में अगर चाय के साथ एक टुकड़ा गुड़ (Jaggery) मिल जाए, तो उसका स्वाद दिल तक उतर जाता है। भारत में गुड़ सिर्फ एक मिठास नहीं, बल्कि परंपरा है खासकर सर्दियों में। यह शरीर को गर्म रखता है, पाचन सुधारता है और खून को साफ करता है। लेकिन आजकल बाजार में हर चीज की तरह गुड़ में भी मिलावट बढ़ गई है।

फरीदाबाद, दिल्ली, भोपाल से लेकर छोटे कस्बों तक के बाजारों में नकली गुड़ धड़ल्ले से बिक रहा है। बाहर से दिखने में यह असली जैसा ही लगता है, लेकिन इसमें चीनी, रंग और केमिकल मिलाए जाते हैं जो सेहत के लिए ज़हरीले साबित हो सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि आप असली और नकली गुड़ की पहचान करना सीखें।

सर्दियों में बढ़ी गुड़ की डिमांड

जैसे ही ठंड शुरू होती है, घर-घर में तिल-गुड़ के लड्डू, गुड़ की चाय और मूंगफली गुड़ पट्टी का मौसम आ जाता है। बाजारों में मांग बढ़ते ही व्यापारी इसका फायदा उठाने लगते हैं। मिलावटखोर चीनी, ग्लूकोज सिरप और आर्टिफिशियल कलर मिलाकर नकली गुड़ तैयार कर देते हैं। ये देखने में एकदम असली लगता है, लेकिन सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। खाद्य विभाग की कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, नकली गुड़ में सल्फर डाइऑक्साइड जैसे रसायन मिलाए जाते हैं ताकि वह ज्यादा चमकदार दिखे। लगातार इसका सेवन करने से पेट दर्द, सिरदर्द और एलर्जी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

असली और नकली गुड़ में फर्क कैसे पहचानें?

1. रंग से करें पहचान

असली गुड़ का रंग हल्का या गहरा भूरा होता है, कभी बहुत ज्यादा चमकदार नहीं दिखता। जबकि नकली गुड़ बहुत चमकीला और एकसमान रंग का होता है। अगर गुड़ का रंग सुनहरा पीला या लाल झलक वाला लगे, तो समझ लीजिए कि उसमें केमिकल मिला है।

2. पानी टेस्ट से करें जांच

गुड़ का छोटा टुकड़ा गुनगुने पानी में डालें। असली गुड़ धीरे-धीरे घुल जाएगा और पानी हल्का भूरा होगा। नकली गुड़ जल्दी टूटकर पानी में सफेद परत छोड़ देता है या नीचे तलछट जैसा जमा हो जाता है।

3. आग के पास करें टेस्ट

एक चम्मच पर थोड़ा गुड़ रखें और हल्की आग के पास ले जाएं। असली गुड़ बिना काले धुएं के धीरे-धीरे पिघलेगा, जबकि नकली गुड़ से बदबूदार धुआं और रासायनिक गंध निकलेगी।

4. स्पर्श से पहचानें

असली गुड़ हल्का चिपचिपा और थोड़ा खुरदुरा होता है। इसमें प्राकृतिक नमी रहती है। नकली गुड़ बहुत चिकना और सूखा होता है, क्योंकि उसमें चमक लाने के लिए रासायनिक पॉलिश की जाती है।

क्यों बढ़ रही है नकली गुड़ की मिलावट?

दरअसल, गुड़ की मांग सर्दियों में कई गुना बढ़ जाती है। व्यापारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए जल्दी तैयार होने वाला नकली गुड़ बनाते हैं। असली गुड़ बनने में 8-10 घंटे लगते हैं, जबकि नकली गुड़ 2-3 घंटे में बनकर तैयार हो जाता है। यही कारण है कि यह सस्ता पड़ता है और देखने में भी आकर्षक लगता है। हालांकि, इस मिलावट से किसानों और असली उत्पादकों को नुकसान होता है। असली गुड़ की कीमत जहां 80 से 100 रुपये किलो है, वहीं नकली गुड़ 50-60 रुपये किलो में बिक जाता है। आम उपभोक्ता सस्ते दाम में इसे खरीद लेता है, बिना ये जाने कि यह सेहत के लिए नुकसानदायक है।

असली गुड़ के सेहत से जुड़े फायदे

असली गुड़ सिर्फ स्वाद बढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। यह खून को साफ करता है और शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। गुड़ खाने से डाइजेशन बेहतर होता है और कब्ज में राहत मिलती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और खनिज शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं। सर्दियों में यह शरीर को गर्मी और ऊर्जा दोनों देता है। हर दिन खाना खाने के बाद एक छोटा टुकड़ा गुड़ खाने की परंपरा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत का राज़ भी है।

नकली गुड़ से हो सकते हैं ये नुकसान

अगर आप बिना जांच के गुड़ खरीदते हैं, तो यह शरीर में ज़हर जैसा असर कर सकता है। नकली गुड़ में मौजूद केमिकल्स से लिवर पर असर पड़ सकता है। पेट में जलन और गैस की समस्या बढ़ सकती है। सिरदर्द और एलर्जी की दिक्कत हो सकती है। लंबे समय में हार्मोनल असंतुलन और स्किन प्रॉब्लम्स भी बढ़ सकती हैं। इसलिए हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही गुड़ खरीदें और खरीदने से पहले ऊपर बताए गए टेस्ट ज़रूर करें।

गुड़ खरीदते वक्त रखें ये बातें ध्यान में

  • ढेलेदार या खुरदुरे टेक्सचर वाला गुड़ लें, बहुत चिकना गुड़ न खरीदें।
  • खुले में रखा गुड़ न लें, क्योंकि उसमें धूल और नमी आसानी से घुस जाती है।
  • सीजनल और देसी गुड़ लें, खासतौर पर गन्ने के रस से बना हुआ।
  • ब्रांडेड पैकिंग होने पर एक्सपायरी डेट और इनग्रेडिएंट्स ज़रूर पढ़ें।

 

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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