‘कौन बनेगा करोड़पति?’ (KBC) टीवी का ऐसा शो है, जो सालों से दर्शकों को मनोरंजन के साथ ही सीख देता रहा है। लेकिन हाल ही में 9 अक्टूबर को एक एपिसोड ने सबको हैरान कर दिया। गुजरात के गांधी नगर से आए 5वीं कक्षा के छात्र इशित भट्ट ने अपनी ऊर्जा और आत्मविश्वास का ऐसा प्रदर्शन किया कि बिग बी भी थोड़े समय के लिए स्तब्ध रह गए।
इशित ने लगातार जल्दी-जल्दी सवालों के जवाब देने की कोशिश की। कई सवालों में तो उन्होंने ऑप्शन देखे बिना ही सही जवाब दे दिया। उनका यह उत्साह दर्शकों को बहुत भाया, लेकिन कभी-कभी जल्दी निर्णय लेने की आदत उन्हें गलत जवाब की ओर भी ले गई।
KBC में इशित भट्ट का आत्मविश्वास और बिग बी की प्रतिक्रिया
इशित ने बिग बी अमिताभ बच्चन से कहा, “मुझे नियम पता है, इसलिए आप मुझे अब नियम मत समझाइए।” इस जवाब ने बिग बी को थोड़ा चौंका दिया। आम तौर पर बिग बी सवाल समझाने के दौरान कंटेस्टेंट की मदद करते हैं, लेकिन इस बार इशित की निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास ने स्थिति को अलग बना दिया। इशित ने तेजी से ऑप्शन देखकर तुरंत निर्णय लिया और कहा, “इसे 4 बार लॉक कर दें।” बिग बी ने भी उनकी बात मानते हुए तुरंत जवाब लॉक कर दिया, हालांकि परिणामस्वरूप यह उत्तर गलत साबित हुआ। इशित की इस हिम्मत और उत्साह को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, तो कुछ ने उनकी निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास की जमकर तारीफ की।
ओवर-एक्साइटमेंट वाले बच्चों के लिए पैरेंटिंग टिप्स
1. धैर्य से सुनें और रिएक्शन दें
बच्चों को तुरंत रोकना या डाँटना उनकी भावनाओं को दबा सकता है। इसके बजाय हमें उनकी बात को पूरी तरह धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए। जब बच्चे महसूस करते हैं कि उनकी भावना और उत्साह का सम्मान किया जा रहा है, तो वे अधिक खुलकर अपने विचार साझा करते हैं। यह अभ्यास उन्हें सकारात्मक संवाद और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करता है। धैर्यपूर्वक सुनने से बच्चे यह समझते हैं कि उनकी भावनाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है और यह उन्हें अपनी असफलताओं या गलतियों के बावजूद सीखने और सुधारने के लिए प्रेरित करता है।
2. रूल्स और लिमिटेशन प्यार से समझाएं
बच्चों को नियम और सीमाएं स्पष्ट रूप से बताना आवश्यक है, लेकिन यह हमेशा प्यार और सहानुभूति के साथ होना चाहिए। उदाहरण के लिए, जवाब देने से पहले सोचने की आदत डालना एक महत्वपूर्ण नियम है। इसे बच्चों के लिए खेल या रोचक गतिविधियों के माध्यम से समझाया जा सकता है। जब बच्चे धीरे-धीरे चीज़ें करने की प्रक्रिया सीखते हैं, तो उनका मस्तिष्क और निर्णय लेने की क्षमता दोनों मजबूत होती हैं। सीमाओं को प्यार से समझाने से बच्चे उन्हें बाध्यता की तरह नहीं बल्कि रचनात्मक ढंग से पालन करना सीखते हैं।
3. मनपसंद एक्टिविटी में ऊर्जा लगाएं
ओवर-एक्साइटेड बच्चों की अत्यधिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ने के लिए उन्हें खेल, पेंटिंग, म्यूजिक या अन्य क्रिएटिव एक्टिविटी में लगाना बहुत प्रभावी है। यह उनकी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को संतुलित और उपयोगी दिशा में ले जाता है। क्रिएटिव एक्टिविटी बच्चों को स्वतंत्र सोच, ध्यान और रचनात्मकता विकसित करने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, पेंटिंग करते समय बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं, जबकि खेलों के माध्यम से वे टीम वर्क और निर्णय लेने की प्रक्रिया सीखते हैं।
4. धीरे-धीरे चैलेंज दें
बच्चों को छोटे-छोटे काम या खेल देकर सही निर्णय लेने का समय देना उनके उत्साह को संतुलित करने में मदद करता है। यह न केवल सामाजिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देता है बल्कि उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है। धीरे-धीरे कठिनाई बढ़ाना बच्चों में धैर्य और सोचने की आदत को मजबूत करता है। उदाहरण के लिए, पहेली खेल या रणनीति आधारित खेल बच्चों के निर्णय लेने और परिणाम समझने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
5. तारीफ के साथ सुधार
बच्चों की किसी भी कोशिश की तारीफ करना और साथ में प्यार से यह बताना कि जल्दी निर्णय लेने से कभी-कभी गलती हो सकती है, उनके स्वयं में सुधार और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। इससे बच्चे सकारात्मक आलोचना को अपनाना सीखते हैं और डर या चिंता से मुक्त रहते हैं। यह अभ्यास उन्हें यह सिखाता है कि गलतियाँ सीखने का हिस्सा हैं और किसी भी निर्णय के परिणाम को समझना उतना ही जरूरी है जितना कि उत्साह व्यक्त करना।बच्चे की ऊर्जा को सकारात्मक बनाना






