पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम करती है। आम नागरिकों को कई प्रकार की सेवाएं प्रदान करती है। लेकिन पुलिस कर्मचारी और अधिकारियों की गुंडागर्दी के कई मामले भी अक्सर सामने आते रहते हैं। कुछ पुलिसकर्मी वर्दी के नाम पर जनता को परेशान करते हैं। बिना वजह छोटी-छोटी बातों पर हाथ उठा देते हैं। अपशब्द का इस्तेमाल भी करते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप जनता पुलिस के साथ सुरक्षित महसूस करने के बजाय, उनसे डरती है।
पुलिस का कर्तव्य जनता की सुरक्षा है, इसलिए उनसे डरे नहीं। बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद लें। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। यदि कोई अधिकारी आपके साथ बिना वजह मारपीट करता है या दुर्व्यवहार करता है, तो आप कानूनी मदद भी ले सकते हैं। सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने जनता को कई अधिकार (Police Harassment Legal Rights) दिए हैं। नियमों और प्रावधानों का उल्लेख संविधान में किया गया है।
बिना वजह पुलिस हाथ उठाए तो क्या करें?
आर्टिकल 21 हर व्यक्ति को देश में सम्मान के साथ जीने का हक देता है। कोई भी व्यक्ति आपका अपमान नहीं कर सकता। यदि रोड, बाजार और अन्य किसी स्थान पर कोई पुलिसकर्मी आप पर बिना किसी वजह धमकी देता है या हाथ उठाता है, तो इसे अपराध मना जायेगा। धारा 46 के तहत कोई भी पुलिस कर्मचारी किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट नही कर सकता। आईपीसी धारा 166ए के तहत आप संबंधित अधिकारी के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
हालांकि सरकारी नियमों का उल्लंघन करने, हिंसक विरोध प्रदर्शन, भागने की कोशिश करने इत्यादि मामलों में पुलिस आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। यदि कोई पुलिस वाला आप पर हाथ उठाता है, तो ऐसे मामलों में उनसे उलझे नहीं। बल्कि कानून की मदद लें। सबूत इकट्टा करें। शिकायत में देरी करना भारी पड़ सकता है।
कहाँ करें शिकायत?
पुलिस के अत्इयाचार और भ्रष्टाचार की शिकायत स्थानीय थाने में जाकर कर सकते हैं। यदि एफआईआर या शिकायत दर्ज नहीं होता है, तो आप एसपीआर या डीआईजी को लिखित शिकायत कर सकते हैं। एफआईआर दर्ज न करना भी धार 166ए के तहत अपराध है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग या राज्य मानव अधिकार आयोग में ऑनलाइन या ऑफलाइन शिकायत भी दर्ज करने का अधिकार भी आपको होता है। मजिस्ट्रेट या कोर्ट में भी याचिका दायर की जा सकती है।






