सर्दी की हवाएँ, कम नमी और बार-बार गरम पानी से नहाने की आदत ये तीन बातें मिलकर त्वचा की कुदरती नमी की परत को तोड़ देती हैं। नतीजा यह निकलता है की चेहरा खिंचा-खिंचा लगता है, चमड़ी आटे जैसी दिखती है, होंठ फटने लगते हैं और चेहरा पहले से ज़्यादा मुरझाया हुआ लगता है। खासकर जिनकी चमड़ी पहले से सूखी है, उनके लिए यह मौसम सबसे मुश्किल होता है।

सूखी त्वचा की दिक्कत सिर्फ दिखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई बार जलन, खुजली और लाली भी बढ़ जाती है। ऐसे में बाज़ार के गाढ़े क्रीम अक्सर कुछ ही देर में अपना असर खो देते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि दो पुराने, पारंपरिक और बहुत असरदार तेल जैतून का तेल और बादाम का तेल आज भी चमड़ी को अंदर से ठीक करने और उसमें जान डालने में चमत्कार दिखाते हैं।

सर्दियों में रूखी त्वचा के लिए जैतून का तेल 

जैतून का तेल सदियों से त्वचा की देखभाल में अपने ज़ख्म भरने वाले गुणों के लिए इस्तेमाल होता आया है। ख़ास बात यह है कि यह सिर्फ ऊपर से मुलायमियत नहीं देता, बल्कि चमड़ी की अंदरूनी परतों तक जाकर उसे ठीक करता है। ठंड के मौसम में यह कुदरती तेल आपकी सूखी चमड़ी का सबसे भरोसेमंद साथी बन जाता है।

जैतून का तेल त्वचा की कुदरती ढाल को कैसे मज़बूत करता है?

सर्दियों में जब हवा त्वचा की नमी छीन लेती है, जैतून का तेल चमड़ी की परत को फिर से मज़बूत बनाने में मदद करता है। यह त्वचा की बाहरी परत पर एक सुरक्षा कवच बनाता है जो नमी को लंबे समय तक रोके रखता है। यही वजह है कि इसका असर बाज़ार के कई क्रीम से ज़्यादा देर तक रहता है।

जैतून के तेल में कुदरती गुण, जैसे जीवनसत्व-ई, जीवनसत्व-के और स्क्वेलीन पाए जाते हैं। ये त्वचा को ऐसे तत्वों से बचाते हैं, जो झुर्रियों और बारीक रेखाओं का बड़ा कारण हैं। यही वजह है कि जैतून के तेल को सुंदरता की देखभाल में ख़ूबसूरती का छुपा हथियार कहा जाता है।

जलन, खुजली को शांत करता है

रूखी त्वचा पर होने वाली बेचैनी का एक बड़ा कारण है नमी की कमी। जैतून के तेल के जलन-रोधी गुण बेचैनी को तुरंत कम करते हैं। ठंड में हाथों, पैरों या चेहरे पर होने वाली खुजली पर इसकी हल्की मालिश बहुत आराम देती है।

बादाम का तेल

अगर आपको ऐसी चमड़ी चाहिए जो दिखे मुलायम, पोषित और कुदरती रूप से चमकदार, तो बादाम का तेल आपके लिए सर्दी का एकदम सही साथी है। भारत में इसे बच्चे से लेकर बड़ों तक सबकी त्वचा के लिए सुरक्षित और गुणकारी माना गया है। बादाम के तेल में जीवनसत्व-ई, जीवनसत्व-ए, जीवनसत्व-डी और ओमेगा चिकनाई वाले अम्ल पाए जाते हैं। ये सभी पोषक तत्व त्वचा की लोच बढ़ाते हैं, सूखापन कम करते हैं और चेहरे पर कुदरती चमक लाते हैं। यह तेल मुरझाई हुई और बेजान चमड़ी में जान डालने की ताकत रखता है।

ख़राब हुई चमड़ी की कोशिकाओं को तेज़ी से ठीक करता है

सर्दियों में सूखी पपड़ियाँ बन जाती हैं और त्वचा पपड़ीदार हो जाती है। बादाम का तेल ख़राब कोशिकाओं को ठीक करके नई सेहतमंद कोशिकाएँ बनने की प्रक्रिया को तेज़ करता है। इससे त्वचा कुदरती रूप से मुलायम होने लगती है।

खुजली, सूखापन और दानों को तुरंत शांत करता है

बादाम के तेल में कुदरती रूप से आरामदायक और जलन-रोधी गुण होते हैं, जो खुजली वाली, चिढ़ी हुई और सूखी चमड़ी पर तुरंत राहत देते हैं। यह सर्दी की सबसे आम समस्या पपड़ी पड़ना और खुजली को काफी हद तक खत्म कर देता है।

दोनों तेलों को मिलाकर लगाने से दुगना फ़ायदा

अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में आपकी त्वचा पूरे दिन मुलायम और चमकदार बनी रहे, तो जैतून और बादाम का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मिश्रण त्वचा की परत को ठीक करता है, सूखापन दूर करता है और चेहरे पर कुदरती रौनक लाता है।

कैसे इस्तेमाल करें?

चेहरा धोकर हल्का गरम हो चुके इन दोनों तेलों के मिश्रण को लगाएँ। इससे त्वचा के छिद्र खुल जाते हैं और तेल आसानी से अंदर तक समा जाता है। रात में लगाने से सुबह तक चमड़ी गहराई से पोषित रहती है, जबकि दिन में इसकी हल्की पतली परत भी आपकी चमड़ी को पूरे दिन नमी देती है।

क्यों इन दो तेलों को कहा जाता है सर्दियों का त्वचा बचाने वाला मिश्रण?

सर्दियों में त्वचा अपनी कुदरती मुलायमियत खो देती है, लेकिन ये दोनों तेल सिर्फ सूखापन दूर नहीं करते, बल्कि आपकी त्वचा को सेहतमंद, चमकदार और जवां बनाते हैं। बाज़ार के भारी क्रीम जहाँ ऊपर की परत पर एक लेप बनाते हैं, वहीं जैतून और बादाम का तेल चमड़ी की गहराई तक जाकर उसे भीतर से सुधारते हैं।

ये दोनों तेल त्वचा का रंग सुधारते हैं, बारीक रेखाओं को रोकते हैं, चमड़ी की परत को ठीक करते हैं और सूखेपन को लंबे समय के लिए खत्म करते हैं। यही वजह है कि त्वचा विशेषज्ञ सर्दियों में रासायनिक क्रीम की तुलना में कुदरती तेलों को ज़्यादा असरदार मानते हैं।