उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 29 मार्च को नोएडा में ‘पीडीए’ रैली कर अपने चुनावी अभियान का शंखनाद किया। इसके ठीक बाद, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी बड़ा ऐलान कर दिया है। मायावती ने 31 मार्च, मंगलवार को पार्टी के लखनऊ कार्यालय में सभी प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक को मिशन 2027 के लिए बसपा का चुनावी बिगुल माना जा रहा है।
पार्टी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में बसपा की चुनावी तैयारियों, संगठन की जमीनी मजबूती और आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, सर्व समाज में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के तरीकों पर भी गहराई से चर्चा होगी। बसपा सुप्रीमो मायावती खुद पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक की कमेटियों की मौजूदा स्थिति, दिए गए लक्ष्यों की प्रगति और संगठनात्मक कार्यों की रिपोर्ट लेंगी। यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है, जब बसपा हाल के दिनों में अपने संगठन को मजबूत करने और ‘बहुजन एकता’ पर लगातार जोर दे रही है।
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आंबेडकर जयंती पर जोर, कार्यकर्ताओं को मिलेंगे निर्देश
बैठक में आगामी आंबेडकर जयंती की तैयारियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती को बसपा पूरे जोर-शोर से मनाती रही है और यह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है। सूत्रों के अनुसार, मायावती कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को और अधिक सक्रिय होने और सीधे लोगों के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को पहुंचाने के निर्देश दे सकती हैं। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है, ताकि वे 2027 के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
बसपा की अंदरूनी कमजोरियों को दूर करने की तैयारी
मायावती पार्टी की अंदरूनी कमजोरियों को दूर करने और संगठन में नई जान फूंकने पर खास ध्यान देंगी। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए, बसपा के लिए यह जरूरी है कि वह अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से एकजुट करे और नए मतदाताओं को भी अपने साथ जोड़े। इस बैठक के जरिए मायावती यही संदेश देना चाहती हैं कि बसपा चुनाव के लिए पूरी तरह गंभीर है और अपनी रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में चुनावी हलचल अभी से शुरू हो चुकी है। एक दिन पहले ही, 29 मार्च को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नोएडा में ‘पीडीए’ रैली कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चुनावी अभियान का आगाज किया था। इस रैली के जरिए अखिलेश ने भाजपा सरकार को घेरा और अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने की कोशिश की। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि मायावती की यह बैठक अखिलेश की रैली का सीधा जवाब है और बसपा भी अब मैदान में उतर चुकी है।
PM मोदी ने भी नोएडा रैली में विकास मुद्दों को उठाया
इस राजनीतिक सरगर्मी के बीच, 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नोएडा में एक रैली को संबोधित किया था। पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट परियोजना का जिक्र करते हुए विकास के एजेंडे पर बात की थी। इसके जवाब में, मायावती ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर दावा किया था कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना की शुरुआत उनकी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। यह दिखाता है कि राज्य में अभी से ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमलावर हो गए हैं और हर मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हैं।
बीते कुछ दिनों में जिस तरह प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हैं, उससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी से ही अपने पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है। बसपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इन्हीं तैयारियों का एक हिस्सा है, जिसके जरिए मायावती अपनी पार्टी को चुनावी रण के लिए तैयार कर रही हैं। यह बैठक आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।