भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहे मतदाता सूची सर्वे में चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। नरेला विधानसभा क्षेत्र में कई छोटे मकानों के पते पर दर्जनों फर्जी मतदाताओं के नाम दर्ज मिले हैं, जिसको लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने इन फर्जी मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की मांग को लेकर चुनाव अधिकारियों के सामने विरोध प्रदर्शन किया।
यह मामला तब उजागर हुआ जब केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देश पर मतदाता सर्वे का अभियान चलाया जा रहा था। इस दौरान नरेला के रतन कॉलोनी, अशोका गार्डन और रसालखेड़ी जैसे इलाकों में गंभीर खामियां पाई गईं।
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एक मकान, 57 मतदाता, 15 जातियां
सर्वे के दौरान कुछ पते ऐसे मिले जहां एक छोटे से परिवार के साथ दर्जनों अन्य लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़े हुए थे। उदाहरण के तौर पर:
केस 1: वार्ड 75 के बूथ क्रमांक 57 पर, मकान नंबर 10 महज 800 वर्ग फीट का है। यहां रिटायर्ड इंजीनियर कमलेंद्र गुप्ता अपने 8 सदस्यों के परिवार के साथ रहते हैं। लेकिन, मतदाता सूची में इसी पते पर 15 अलग-अलग जातियों के 57 अतिरिक्त मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए।
केस 2: इसी वार्ड और बूथ पर, मकान नंबर 2 का क्षेत्रफल 1,500 वर्ग फीट है। यहां पोखन लाल साहू अपने 5 सदस्यों के साथ रहते हैं। उनके घर के पते पर 22 विभिन्न जातियों के 66 फर्जी मतदाताओं के नाम मिले। इस बूथ की बीएलओ श्रीमती धनिशा कुशवाहा और सुपरवाइजर देवेंद्र पचौरी हैं।
केस 3: वार्ड 76 के बूथ 68 में, 750 वर्ग फीट के मकान नंबर 2 में देवनारायण विश्वकर्मा अपने 8 सदस्यों के साथ रहते हैं। उनके पते पर 6 अलग-अलग जातियों के 42 फर्जी मतदाता दर्ज थे। यहां बीएलओ ओमप्रकाश रायकवार और सुपरवाइजर शैलेश सक्सेना हैं।
कांग्रेस नेता ने मौके पर किया विरोध
इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने मौके पर ही निर्वाचन दल के सामने विरोध जताया। उन्होंने देवनारायण विश्वकर्मा के घर के सामने बीएलओ और सुपरवाइजर की मौजूदगी में जमीन पर बैठकर इन फर्जी नामों को तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की है और मांग की है कि नरेला विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की गहन जांच कर सभी फर्जी नामों को हटाया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।