मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। दरअसल मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि सिंहस्थ से जुड़े सभी प्रस्तावित कार्य 2027 की दीपावली तक हर हाल में पूरे किए जाएं। वहीं बैठक में ₹2923.84 करोड़ की लागत वाले 22 विकास कार्यों को मंजूरी भी दी गई है। भोपाल में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ के सफल आयोजन, विकास कार्यों की निगरानी और सूचना-शिक्षा-संचार गतिविधियों के लिए जितने भी अधिकारी और कर्मचारी आवश्यक हों, उनकी भर्ती और तैनाती जल्द की जाए।
दरअसल उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना जरूरी है और अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए कर्मचारियों को सघन प्रशिक्षण भी दिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी अधोसंरचना से जुड़े कार्य तय समय सीमा में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरे होने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रिमंडलीय समिति की अगली बैठक उज्जैन में होगी।
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मुख्यमंत्री ने थर्ड पार्टी ऑडिट को अनिवार्य बताया
कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने थर्ड पार्टी ऑडिट को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के लिए बनने वाले भवनों का निर्माण इस तरह किया जाए कि मेले के बाद भी वे सालभर होने वाले आयोजनों में उपयोगी रहें। सड़कों के निर्माण को भी इस तरह से विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे महाकाल लोक के साथ-साथ उज्जैन के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंचना आसान हो सके।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने उज्जैन से 100 किलोमीटर के दायरे में होम स्टे, पार्किंग और अन्य जन सुविधाएं विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंहस्थ के प्रबंधन में स्थानीय संस्थाओं और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके अलावा क्षिप्रा नदी पर पैदल तीर्थ यात्रियों के लिए अलग पुल बनाने के निर्देश भी दिए गए।
कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली
बैठक में कई महत्वपूर्ण सड़क और अधोसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी मिली। इनमें गुदरी चौराहे से पान दरीबा होते हुए हरसिद्धि पाल तक मार्ग चौड़ीकरण और सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण, बम्बई वाले की धर्मशाला से दानी गेट चौराहे तक सड़क चौड़ीकरण, देवास रोड से नानाखेड़ा तक एमआर-2 मार्ग का उन्नयन, शिंदे नर्सिंग होम से नीलगंगा मुख्य मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण, गौतम मार्ग से तिलकेश्वर मार्ग तक सड़क निर्माण, चौबीस खम्बा माता मंदिर से छोटा रूद्र सागर तक मार्ग चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा बदनावर-देवास एनएचएआई रोड से सिकंदरी और दाउदखेड़ी तक सड़क निर्माण, क्षिप्रा नदी के पूर्वी हिस्से में नई सड़क, जयसिंहपुरा क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट सड़क, अंकपात चौराहा से मंगलनाथ तक मार्ग चौड़ीकरण, गदा पुलिया से रविशंकर नगर नरसिंह घाट तिराहे तक चौड़ीकरण और महाकाल चौराहे से गोपाल मंदिर होते हुए कमरी मार्ग चौराहा तक सड़क निर्माण भी प्रस्तावित है। शनि मंदिर से मेठिया मार्ग तक नया पुल बनाने की भी योजना है।
इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने को भी मंजूरी
सिंहस्थ के लिए ₹139.14 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) बनाने को भी मंजूरी दी गई है। यह केंद्र आधुनिक तकनीक से लैस होगा और यहां से सीसीटीवी, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स के जरिए पूरे मेले की गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा और मोबाइल ऐप के माध्यम से श्रद्धालुओं को रूट, पार्किंग और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। यह केंद्र साइबर सुरक्षा, कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और स्वच्छता पर भी नजर रखेगा।
इसके अलावा लगभग ₹30 करोड़ की लागत से मेला कंट्रोल रूम, देवास गेट बस स्टैंड पर मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब, इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब से उज्जैन रेलवे स्टेशन तक स्काईवॉक निर्माण, सर्किट हाउस निर्माण और मेला क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचना विकसित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। इन कार्यों में पक्की सड़कें, डिवाइडर, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट, सर्विस रोड, जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो सिंहस्थ के बाद भी शहर के लिए उपयोगी रहेंगी।
बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल सहित कई कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सिंहस्थ-2028 को लेकर सरकार की तैयारियों को इस बैठक में विस्तार से समीक्षा की गई।