मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बहुचर्चित कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी और बसपा की पूर्व विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह परिहार समेत सात दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि, सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए कोर्ट ने 18 अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
यह फैसला निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई अपील पर आया है, जिसमें 25 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद मामले में दोषी करार दिए गए सात लोगों को अब अपनी पूरी जिंदगी जेल में गुजारनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 15 मार्च 2019 की है, जब दमोह के हटा थाना क्षेत्र में कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया और उनके बेटे पर जानलेवा हमला किया गया था। इस हमले में देवेंद्र चौरसिया गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी, क्योंकि इसमें तत्कालीन बसपा विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया था।
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर
मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने गोविंद सिंह परिहार समेत 25 आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों की समीक्षा की। समीक्षा के आधार पर कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि केवल सात आरोपियों के खिलाफ ही अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने गोविंद सिंह समेत सात दोषियों की सजा को बरकरार रखने का फैसला किया, जबकि बाकी 18 आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।





