ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन करने वाले हजारों किसानों के लिए दूध उत्पादन आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में दूध संग्रहण और भुगतान व्यवस्था को आसान और भरोसेमंद बनाना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी उद्देश्य से इंदौर सहकारी दुग्ध संघ ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब किसानों को दूध लेकर दूर स्थित संग्रह केंद्रों तक नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि दूध संग्रह वाहन सीधे उनके गांव और घरों तक पहुंचेंगे।
इस नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ सुविधा देना नहीं है, बल्कि दूध की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी है। दुग्ध संघ का मानना है कि जब किसानों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो वे पशुपालन में ज्यादा निवेश करेंगे और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
दूध गुणवत्ता निगरानी के लिए ऐप बनेगा बड़ा सहारा
दूध व्यवसाय में सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता बनाए रखना होती है। कई बार दूध की जांच में देरी होने या जानकारी समय पर नहीं मिलने से किसानों और संग्रह केंद्रों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए मोबाइल आधारित मिल्क टेस्टिंग ऐप का उपयोग शुरू किया गया है।
यह ऐप दूध के फैट, एसएनएफ और अन्य गुणवत्ता मानकों की तुरंत जांच कर परिणाम उपलब्ध कराता है। जांच पूरी होते ही जानकारी किसान और संबंधित प्लांट तक पहुंच जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी तरह की गलतफहमी की संभावना कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित यह व्यवस्था भविष्य में डेयरी सेक्टर को और अधिक संगठित बना सकती है।
इसके अलावा डिजिटल निगरानी से दूध की गुणवत्ता लगातार बेहतर रखने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं तक भी बेहतर गुणवत्ता वाला दूध पहुंच सकेगा। डेयरी क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस, नई समितियों का तेजी से विस्तार
इंदौर दुग्ध संघ का फोकस केवल दूध संग्रह तक सीमित नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। जिले में अब तक 232 नई दुग्ध समितियां बनाई जा चुकी हैं, जबकि नौ नए मिल्क रूट भी शुरू किए गए हैं। वर्तमान में 42 हजार से ज्यादा किसान इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
किसानों को नियमित आर्थिक सहायता देने के लिए भुगतान प्रणाली में भी सुधार किया गया है। अब हर महीने तीन बार भुगतान किया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को नकदी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता। इसके साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के जरिए किसानों को बेहतर नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घर-घर दूध संग्रह, डिजिटल गुणवत्ता जांच और समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में जिले का दुग्ध उत्पादन तेजी से बढ़ सकता है। इससे न केवल किसानों की आय में इजाफा होगा, बल्कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण विकास का और मजबूत आधार बनकर उभर सकता है।






