मध्य प्रदेश विधानसभा में डिजिटल कामकाज की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में 28, 29 और 30 अक्टूबर को विधायकों, उनके निजी सहायकों (PA) और सरकारी विभागों के नोडल अधिकारियों को नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NEVA) की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद विधानसभा में सवाल लगाने, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल के नोटिस भेजने से लेकर जवाब और जरूरी दस्तावेज देखने तक की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से करने की तैयारी है। इसका मकसद कागजी काम कम करना और विधानसभा सचिवालय, विधायकों तथा विभागों के बीच तालमेल को आसान बनाना है।
दरअसल मध्य प्रदेश विधानसभा में होने वाली इस ट्रेनिंग में मंत्रियों को छोड़कर बाकी विधायकों को शामिल किया जाएगा। विधायकों के 50-50 के बैच बनाए गए हैं। उनके साथ काम करने वाले PA और दूसरे स्टाफ को भी डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। यह ट्रेनिंग सिर्फ टैबलेट चलाने तक सीमित नहीं होगी बल्कि विधानसभा से जुड़े रोजमर्रा के काम ऑनलाइन करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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हर काम डिजिटल तरीके से करना फोकस
वहीं प्रशिक्षण के दौरान विधायकों को बताया जाएगा कि वे अपने सवाल और नोटिस डिजिटल तरीके से कैसे जमा कर सकते हैं। इसके अलावा सदन की कार्यसूची देखने, कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज हासिल करने और विभागों से मिलने वाले जवाब ऑनलाइन देखने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी। सरकारी विभागों की विधानसभा शाखाओं के नोडल अधिकारियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा ताकि सवालों और नोटिस पर जवाब देने का काम डिजिटल माध्यम से हो सके।
विधायक सीखेंगे सवाल और नोटिस ऑनलाइन भेजना
नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन यानी NEVA केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत संसदीय कार्य मंत्रालय की पहल है। इसका मकसद विधानसभा की कार्यवाही और उससे जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था में सवाल, उनके जवाब, विधेयक, नोटिस और सदन की कार्यसूची जैसे दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से देखे जा सकते हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा में होने वाली तीन दिन की ट्रेनिंग में विधायकों को इन सुविधाओं का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। अभी सवाल लगाने या किसी मुद्दे पर नोटिस देने की प्रक्रिया में अलग-अलग दस्तावेजों और संबंधित कार्यालयों के बीच तालमेल की जरूरत होती है। डिजिटल व्यवस्था के तहत विधायक अपने लॉगिन के जरिए संबंधित काम कर सकेंगे। उनके PA को भी इस प्रक्रिया में सहयोग करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
इस व्यवस्था में सरकारी विभागों की भूमिका भी अहम होगी। विभागों के नोडल अधिकारियों को सवाल और नोटिस से जुड़ी जानकारी हासिल करने, संबंधित शाखाओं से जवाब तैयार कराने और जवाब विधानसभा सचिवालय तक भेजने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इससे विधायक कार्यालयों और विभागों के बीच जानकारी भेजने का काम एक ही डिजिटल व्यवस्था के जरिए करने में मदद मिल सकती है।
दिसंबर के विधानसभा सत्र से पहले तैयारी
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। 14 से 26 दिसंबर के बीच सत्र आयोजित होने की बात सामने आई है। ऐसे में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में होने वाली NEVA ट्रेनिंग को नई डिजिटल व्यवस्था की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। सत्र के दौरान विधायकों की ओर से सवाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल के नोटिस दिए जाते हैं। इन पर संबंधित विभागों को जानकारी जुटाकर जवाब देना होता है। इस प्रक्रिया में विधायक कार्यालयों, विधानसभा सचिवालय और सरकारी विभागों के बीच लगातार संपर्क की जरूरत रहती है। NEVA के इस्तेमाल से इन कामों को ऑनलाइन संभालने में मदद मिल सकती है।
