मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और जीवन से जुड़ा हुआ उत्सव है। मां नर्मदा जयंती के अवसर पर पूरे प्रदेश में श्रद्धालु उत्साह और भक्ति के साथ इस पावन दिन को मना रहे हैं। सुबह से ही नर्मदा तटों पर स्नान, पूजा और आरती का सिलसिला शुरू हो गया है।
मां नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी माता हैं, जिनके जल से प्रदेश की खेती, संस्कृति और सभ्यता जुड़ी हुई है। यही कारण है कि नर्मदा जयंती मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर मनाई जाती है और इसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं।
नर्मदा जयंती का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
नर्मदा जयंती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां नर्मदा का प्राकट्य हुआ था। शास्त्रों में नर्मदा को मोक्षदायिनी नदी कहा गया है। कहा जाता है कि नर्मदा दर्शन मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है।
नर्मदा तट के शहरों में भव्य आयोजन
आज नर्मदापुरम, जबलपुर, ओंकारेश्वर, नरसिंहपुर, महेश्वर, बड़वानी, धार, अमरकंटक और भोपाल समेत कई शहरों में नर्मदा जयंती के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नर्मदा घाटों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है।
दमोह जिले में भव्य चुनरी उत्सव
दमोह जिले में मां नर्मदा जयंती की पूर्व संध्या पर भक्ति और आस्था से भरा भव्य चुनरी उत्सव देखने को मिला। शहर के नर्मदेश्वर शिव मंदिर से शुरू हुई विशाल चुनरी यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। बैंड-बाजे, जयकारों और भजन-कीर्तन के बीच भक्त एक लंबी पवित्र चुनरी लेकर शहर की मुख्य सड़कों से होते हुए बड़ी देवी जी मंदिर पहुंचे, जहां इस चुनरी को मां नर्मदा के प्रतीक रूप में अर्पित किया गया। इस धार्मिक आयोजन में समाज के हर वर्ग के लोगों ने भाग लिया। खासतौर पर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश और चुनरी लेकर शामिल हुईं, जिससे पूरा माहौल श्रद्धा, भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।





