महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार ने शुक्रवार (19 सितंबर) को नागपुर में बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि आपसी सम्मान और राज्य की प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता ही वजह है कि उनकी पार्टी आज भी महायुति गठबंधन का हिस्सा है। नागपुर में आयोजित एनसीपी के चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात रखी।
अजित पवार ने कहा कि उन्होंने शरद पवार की एनसीपी से अलग होने का फैसला किसी पद या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र को राजनीतिक स्थिरता और विकास दिलाने के लिए किया था। जुलाई 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने का फैसला किया था और उसी समय उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पवार ने कहा कि इस फैसले से उन्हें पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों में तनाव झेलना पड़ा, लेकिन राज्यहित में यह कदम जरूरी था।
अजित पवार ने दिया बड़ा बयान
एनसीपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि चिंतन शिविर केवल आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी की भावी पीढ़ी और संगठन को मजबूत बनाने पर भी केंद्रित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और सरकारी कामकाज में देरी नहीं होनी चाहिए।
अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश को स्थिरता मिली है और महाराष्ट्र को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार और राज्य नेतृत्व ने गंभीरता से लिया और महाराष्ट्र के विकास के लिए बड़ा दिल दिखाया। उन्होंने इसे गठबंधन में बने रहने का बड़ा कारण बताया।
अपने संबोधन में पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि एनसीपी का लक्ष्य केवल सत्ता में बने रहना नहीं, बल्कि राज्य के हर वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। पवार के इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम संदेश माना जा रहा है, खासकर तब जब महायुति गठबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।





