एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने सोमवार को राज्य के मंत्री और शिवसेना विधायक संजय शिरसाट से दो दिनों के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है। पवार ने आरोप लगाया कि शिरसाट ने इस साल की शुरुआत में सिडको (CIDCO) अध्यक्ष रहते हुए नवी मुंबई में एक परिवार को कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन आवंटित कर दी। उन्होंने दावा किया कि इस कथित घोटाले से जुड़े उनके पास ठोस सबूत मौजूद हैं।
संजय शिरसाट पर 5,000 करोड़ के घोटाले का दावा
रोहित पवार ने बताया कि उनके पास 12,000 पन्नों का दस्तावेजी सबूत है। इसमें 1993 का आवेदन, सिडको के चार अस्वीकृति आदेश, विधि एवं न्याय विभाग की रिपोर्टें, शहरी विकास विभाग के पत्र, सिडको प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे शामिल हैं। पवार के मुताबिक, सिडको ने 1994, 1995 और 2010 में इस परिवार के दावों को खारिज कर दिया था, लेकिन शिरसाट ने अध्यक्ष रहते हुए उन फैसलों को दरकिनार कर आवंटन कर दिया। पवार ने कहा कि यह सीधे-सीधे हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है और इसके लिए जिम्मेदार मंत्री को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
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उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था तो भूमि का आवंटन कैसे किया गया। पवार ने यह भी दावा किया कि संबंधित परिवार ने पहले ही इस 5,000 करोड़ रुपये की जमीन बिल्डरों को बेच दिया है। उन्होंने मांग की कि तुरंत 61,000 वर्ग मीटर के भूखंड को फ्रीज किया जाए और 8,000 वर्ग मीटर का वह प्लॉट, जो पहले ही एक निजी व्यक्ति को आवंटित हो चुका है, सरकार वापस ले। पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सबूत मांगे थे और अब उन्हें सौंप दिए गए हैं, इसलिए अब फैसला सरकार को करना है।
रोहित पवार ने साफ कहा कि यदि शिरसाट ने दो दिन में इस्तीफा नहीं दिया तो गणेश चतुर्थी के बाद अगली कार्रवाई तय की जाएगी। इस पूरे विवाद पर राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रोहित पवार के पास जो भी सबूत हैं, उनकी जांच आवश्यक है। भुजबल ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को अदालत में ले जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके, न कि केवल सार्वजनिक मंचों पर आरोप-प्रत्यारोप के जरिए चर्चा हो।