पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार को मुर्शिदाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। बनर्जी ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि टीएमसी का लक्ष्य मुर्शिदाबाद से 22-0 का स्कोर बनाना है, यानी जिले की सभी विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा को यहां ‘एक इंच भी जगह नहीं दी जानी चाहिए’। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में चुनाव आयोग (ईसी) की भूमिका पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना

अभिषेक बनर्जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च-रैंकिंग अधिकारियों को जानबूझकर बदला गया है ताकि भाजपा रामनवमी के दौरान हिंसा फैला सके। बनर्जी ने दावा किया कि रामनवमी पर भाजपा ने ही हिंसा फैलाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आपने कभी ऐसी हिंसा देखी है जब दुर्गा पूजा या ईद जैसे त्यौहार मनाए जाते हैं? उनका इशारा स्पष्ट था कि कुछ विशेष त्योहारों को राजनीतिक लाभ के लिए हिंसक बनाया जा रहा है। बनर्जी ने उन लोगों की कड़ी आलोचना की जो “हथियारों के साथ और नशे की हालत में रामनवमी मना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने भगवान राम का इतिहास नहीं पढ़ा है और उन्हें भगवान राम के आदर्शों को समझना चाहिए, जो शांति और मर्यादा के प्रतीक हैं। इस बयान से उन्होंने भाजपा के रामनवमी समारोहों के राजनीतिकरण पर गंभीर सवाल उठाए, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी बहस छिड़ गई है।

टीएमसी महासचिव ने पार्टी के भीतर संभावित दलबदलुओं और भीतरघातियों को भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा,

“मेरी नजर सब पर है। इसे एक चेतावनी समझें।”

बनर्जी ने जोर देकर कहा कि अगर कोई एक टीम की जर्सी पहनता है, तो उसे उस टीम के प्रति वफादार रहना चाहिए और दूसरी टीम के लिए नहीं खेलना चाहिए। यह संदेश उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए था जो चुनाव से पहले या उसके दौरान पाला बदल सकते हैं या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि तृणमूल कांग्रेस निश्चित रूप से चुनाव जीतेगी। इसके बाद, उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि,

“मैच के बाद (चुनावों के बाद) आपको ‘रेड कार्ड’ दिखाया जाएगा और बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।”

यह ‘रेड कार्ड’ की धमकी राज्य की राजनीति में दलबदल की संस्कृति पर अंकुश लगाने की टीएमसी की कोशिश को दर्शाती है और पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने का एक सशक्त प्रयास है, खासकर चुनाव से पहले जब ऐसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

हुमायूं कबीर और अधीर चौधरी को सीधी चुनौती

अपनी जनसभा के दौरान, अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और भाजपा के दो प्रमुख नेताओं, हुमायूं कबीर और अधीर चौधरी को भी सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा,

“मैं हुमायूं कबीर और अधीर चौधरी को चुनौती देता हूं कि वे केंद्र सरकार से अपनी सुरक्षा वापस लेने के लिए कहें।”

बनर्जी ने दावा किया कि अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें ऐसा करना चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों पर “बेरहमी से अत्याचार” किया है। उन्होंने यह भी वादा किया कि यदि ये नेता अपनी केंद्र द्वारा दी गई सुरक्षा छोड़ते हैं, तो राज्य सरकार 24 घंटे के भीतर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी। यह चुनौती न केवल इन नेताओं पर दबाव बनाने के लिए थी, बल्कि अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने और टीएमसी को उनके संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करने का भी एक प्रयास था। इस कदम से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, क्योंकि यह केंद्र और राज्य के बीच सुरक्षा के मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा कर सकता है और इन नेताओं की निष्ठा पर भी सवाल खड़े करेगा।

आवास योजनाओं के लिए केंद्र पर गंभीर आरोप

अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर पश्चिम बंगाल के गरीबों के लिए आवास योजनाओं के लिए ‘एक पैसा भी मंजूर न करने’ का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार ने सत्ता में रहते हुए असम, बिहार और त्रिपुरा जैसे राज्यों में महिलाओं, युवाओं, वृद्धों और समाज के अन्य वर्गों के लिए कई विकासात्मक पहल शुरू की हैं। हालांकि, बनर्जी के अनुसार, बंगाल के साथ केंद्र सरकार ने इस मामले में सौतेला व्यवहार किया है और राज्य के गरीबों को उनके हक से वंचित रखा है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार की राज्य के प्रति भेदभावपूर्ण नीति का स्पष्ट उदाहरण है, जिससे लाखों गरीब परिवार छत के अधिकार से वंचित हैं। बनर्जी ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और राज्य के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर संदेह व्यक्त किया।

केंद्र सरकार पर वित्तीय सहायता न देने का आरोप लगाते हुए भी, अभिषेक बनर्जी ने तृणमूल सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि,

“हालांकि उन्होंने (केंद्र सरकार ने) 10 पैसे भी मंजूर नहीं किए, लेकिन हम अगले छह महीनों में राज्य के हर व्यक्ति के सिर पर छत सुनिश्चित करेंगे।”

यह वादा राज्य सरकार की आत्मनिर्भरता और अपनी योजनाओं को केंद्रीय फंड के बिना भी पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है। बनर्जी का यह बयान केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और साथ ही राज्य के मतदाताओं को यह संदेश देने का भी एक तरीका था कि टीएमसी उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे केंद्र का सहयोग मिले या न मिले। आगामी चुनाव में आवास योजना और केंद्र-राज्य के बीच फंड के बंटवारे का मुद्दा एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की संभावना है, और बनर्जी का यह आक्रामक रुख इस बहस को और तेज करेगा।